बिना कोचिंग, सिर्फ सेल्फ-स्टडी के बल पर SDM बनीं बिहार की प्रेरणा प्रणय; हासिल की 288वीं रैंक

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बिना कोचिंग, सिर्फ सेल्फ-स्टडी के दम पर बिहार की प्रेरणा प्रणय बनीं SDM; हासिल की 288वीं रैंक

पटना / बिहार: दृढ़ संकल्प, सही रणनीति और खुद पर अटूट विश्वास हो तो कोई भी मंजिल कठिन नहीं होती। इस बात को सच साबित कर दिखाया है बिहार की प्रेरणा प्रणय ने। प्रेरणा ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहराते हुए 288वीं रैंक हासिल की है। इस शानदार उपलब्धि के साथ ही उनका चयन सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के पद पर हुआ है।

बिना कोचिंग, सिर्फ सेल्फ-स्टडी के बल पर SDM बनीं बिहार की प्रेरणा प्रणय; हासिल की 288वीं रैंक

स्वाध्याय (Self-Study) को बनाया अपनी सबसे बड़ी ताकत

आज के दौर में जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े-बड़े कोचिंग संस्थानों का सहारा लिया जाता है, वहीं प्रेरणा ने बिना किसी कोचिंग की मदद के केवल सेल्फ-स्टडी के बल पर यह ऐतिहासिक सफलता अर्जित की है।

अपनी तैयारी के सफर के बारे में बताते हुए प्रेरणा ने कहा कि उन्होंने इंटरनेट का सही इस्तेमाल, मानक किताबों (Standard Books) और ऑनलाइन उपलब्ध स्टडी मटेरियल को अपनी तैयारी का आधार बनाया। BPSC के सिलेबस को गहराई से समझने के बाद उन्होंने खुद के नोट्स तैयार किए और एक अनुशासित दिनचर्या के साथ पढ़ाई की।

रिवीजन और आंसर राइटिंग पर रहा खास फोकस

प्रेरणा की सफलता का मूल मंत्र था 'स्मार्ट वर्क और रिवीजन'। उन्होंने सिर्फ नई सामग्री पढ़ने के बजाय पहले से पढ़े गए टॉपिक्स के बार-बार रिवीजन पर ध्यान केंद्रित किया।

मुख्य परीक्षा (Mains) में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए प्रेरणा रोजाना 'उत्तर लेखन' (Answer Writing) का अभ्यास करती थीं। इस नियमित अभ्यास से न केवल उनके उत्तरों की गुणवत्ता में सुधार हुआ, बल्कि परीक्षा में समय प्रबंधन (Time Management) करने में भी बड़ी मदद मिली।

तैयारी कर रहे युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

अपनी इस उपलब्धि के साथ प्रेरणा प्रणय ने देश और प्रदेश के तमाम अभ्यर्थियों को एक नया दृष्टिकोण और प्रेरणा दी है। उन्होंने छात्रों के नाम संदेश देते हुए कहा:

"कोचिंग संस्थान कभी भी सफलता की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं होते। यदि आपके पास सही रणनीति है, आप कठिन परिश्रम करने से पीछे नहीं हटते और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हैं, तो आप घर बैठे भी किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।"

प्रेरणा की इस सफलता से न केवल उनका परिवार गौरवान्वित है, बल्कि पूरा बिहार उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है। उनकी यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

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