वागड़ की बेटी का फिर बजा डंका: काजल गरासिया चौथी बार बनीं जिला स्तर पर बेस्ट खो-खो प्लेयर, रचा इतिहास
कुशलगढ़ (बांसवाड़ा) : "कहते हैं बेटियां किसी से कम नहीं होतीं, और इस बात को अपनी लगन व खेल के दम पर सच कर दिखाया है वागड़ की लाडली काजल गरासिया ने।"
कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के छोटे से आदिवासी बाहुल्य गांव जालीमपुरा की बेटी काजल गरासिया ने एक बार फिर मैदान पर अपनी फुर्ती और दांव-पेंच से पूरे जिले में प्रतिभा का लोहा मनवाया है। बांसवाड़ा में आयोजित 17 वर्ष आयु वर्ग की जिला स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता में काजल ने न केवल अपनी टीम को सिरमौर बनाया, बल्कि सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी (Best Player) का खिताब भी अपने नाम किया।
कांटे के मुकाबले में झटके 8 विकेट, जालीमपुरा को दिलाया खिताब
बांसवाड़ा जिला मुख्यालय पर आयोजित इस प्रतियोगिता में जिले की 20 से अधिक टीमों ने हिस्सा लिया था। जालीमपुरा और बांसवाड़ा शहर की टीम के बीच खेला गया फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा।
मैदान पर उतरीं कक्षा 11 की छात्रा काजल गरासिया ने अपनी गजब की फुर्ती, गति और चालाकी का प्रदर्शन करते हुए अकेले ही विपक्षी टीम के 8 खिलाड़ियों को आउट कर मुकाबला अपनी टीम की तरफ मोड़ दिया। काजल के इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए निर्णायकों ने एकमत होकर उन्हें प्रतियोगिता का 'बेस्ट प्लेयर' घोषित किया।
📊 काजल का अब तक का स्वर्णिम सफर:• 14 वर्ष आयु वर्ग: 2 बार जिला बेस्ट प्लेयर• 17 वर्ष आयु वर्ग: 2 बार जिला बेस्ट प्लेयर• कुल रिकॉर्ड: 4 बार लगातार जिला स्तर पर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी
सुबह 5 बजे से मेहनत, किसान पिता की लाडली की बड़ी उड़ान
पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जालीमपुरा में पढ़ने वाली काजल एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। पिता किसान हैं और मां गृहिणी, लेकिन परिजनों ने आर्थिक तंगहाली के बावजूद काजल के सपनों के आड़े कभी बंदिशें नहीं आने दीं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया, "काजल पढ़ाई और खेल दोनों में अव्वल है। वह रोजाना सुबह 5 बजे उठकर मैदान में पसीना बहाती है। उसकी यह सफलता बाकी छात्राओं के लिए एक बड़ी मिसाल है।"
कोच बोले- "राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करने का मादा", खेल छात्रवृत्ति की मांग
काजल के खेल से प्रभावित होकर उनके कोच ने कहा कि उसमें राष्ट्रीय स्तर की एथलीट बनने की पूरी क्षमता है।
"काजल की रनिंग स्पीड और दांव-पेंच कमाल के हैं। यदि उसे सही मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिलें, तो वह राष्ट्रीय मंच पर राजस्थान का नाम रोशन करेगी। सरकार को चाहिए कि ऐसी ग्रामीण व आदिवासी प्रतिभाओं को निखारने के लिए विशेष खेल छात्रवृत्ति और उच्च स्तरीय ट्रेनिंग की व्यवस्था करे।" — टीम कोच
गांव में ढोल-नगाड़ों से स्वागत, भावुक हुईं मां
जैसे ही काजल के चौथी बार बेस्ट प्लेयर बनने की खबर जालीमपुरा पहुंची, पूरे गांव में दीवाली जैसा जश्न शुरू हो गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ अपनी लाडली का भव्य स्वागत किया।
मां का भावुक संदेश: "हम भले अनपढ़ हैं, लेकिन अपनी बेटी को पढ़ाने और खिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज उसने पूरे जिले में हमारा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।"
काजल का संकल्प: "मेरा सपना नेशनल स्तर पर खेलना और अपने गांव का नाम रोशन करना है। मैं हर लड़की से कहना चाहती हूं—डरो मत, आगे बढ़ो। खेलो भी और पढ़ो भी, हम बेटियां किसी से कम नहीं हैं।"

