फर्जी ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग के जरिए 12 करोड़ से अधिक की ठगी: असम का आरोपी विशाखापट्टनम से गिरफ्तार
राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (जयपुर) ने फर्जी ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग वेबसाइट के जरिए ₹12 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का पर्दाफाश करते हुए एक और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने असम निवासी बेशराज थापा उर्फ राहुल को विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) से दबोचा है। इस अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट में अब तक कुल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है। पुलिस ने सक्षम न्यायालय से 5 दिन का ट्रांजिट वारंट प्राप्त कर आरोपी को जयपुर, राजस्थान ले आई है।
व्हाट्सएप लिंक और फर्जी मुनाफे का खेल
साइबर ठगों ने परिवादी को बेहद सुनियोजित तरीके से अपने जाल में फंसाया:
वेबसाइट का लिंक: 25 सितंबर 2025 को परिवादी के व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से संदेश आया, जिसमें
www.kdeonegold.netवेबसाइट का लिंक भेजा गया था। इस पर ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग और भारी रिटर्न का झांसा दिया गया था।वर्चुअल वॉलेट में फर्जी मुनाफा: परिवादी ने खाता बनाकर कस्टमर सर्विस के निर्देश पर विभिन्न बैंक खातों में निवेश शुरू किया। 7 अक्टूबर से 4 नवंबर 2025 के बीच लगभग ₹6 करोड़ जमा किए गए। वेबसाइट के वर्चुअल वॉलेट में लाभ सहित लगभग ₹9.42 करोड़ की रकम दिखाकर विश्वास जीता गया।
निकासी के नाम पर अतिरिक्त वसूली: 7 नवंबर 2025 को जब परिवादी ने ₹5.02 करोड़ की निकासी का प्रयास किया, तो ठगों ने इनकम टैक्स, प्रोसेसिंग फीस व अन्य शुल्कों के नाम पर और पैसे ऐंठ लिए। इस तरह 26 नवंबर 2025 तक कुल ₹12,09,65,512 हड़प लिए गए और न तो मूल राशि लौटाई गई और न ही निकासी की अनुमति दी गई।
आरोपी की भूमिका और साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश
पूर्व में गिरफ्तार आरोपी इकबाल अहमद से पूछताछ के आधार पर बेशराज थापा की भूमिका सामने आई:
म्यूल खातों की निगरानी: आरोपी बेशराज ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खाताधारकों (Mule Account Holders) को होटल या कमरों में साथ रखकर उनकी निगरानी करता था और उनके लाइव फोटो व वीडियो अपने साथियों तक भेजता था।
सिम व खातों की दलाली: आरोपी हर्षा साइकिया उर्फ गौरव और इस्लाम के संपर्क में था। गुवाहाटी के एक होम-स्टे में प्रकाश कुमार नामक खाताधारक के बैंक खाते और लिंक सिम की जानकारी इस्लाम तक पहुंचाने के एवज में बेशराज को ₹50,000 मिले थे। इस खाते में ठगी के ₹33,75,328 ट्रांसफर हुए थे।
फोन तोड़कर भागा: साथी इकबाल की गिरफ्तारी के बाद आरोपी विशाखापट्टनम भाग गया था और उसने ठगी में प्रयुक्त मोबाइल फोन को तोड़कर नष्ट कर दिया था।
पुलिस कार्रवाई और तकनीकी अनुसंधान
डीआईजी (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन तथा डीएसपी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम में पुलिस निरीक्षक अमृता सिंह, उप निरीक्षक मुकेश कुमार, कांस्टेबल बोदूराम और बनवारी लाल शामिल रहे। पुलिस अब व्हाट्सएप/टेलीग्राम रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और मनी ट्रेल के जरिए ठगी की रकम के अंतिम लाभार्थियों व फरार आरोपियों (हर्षा साइकिया और इस्लाम) की तलाश कर रही है।
साइबर पुलिस की आमजन को एडवाइजरी
कम समय में अत्यधिक या निश्चित रिटर्न के दावों और अनजान सोशल मीडिया ग्रुप्स के निवेश संदेशों पर भरोसा न करें।
शेयर बाजार व वित्तीय उत्पादों में निवेश से पहले सेबी (SEBI) या संबंधित नियामक की आधिकारिक वेबसाइट पर ब्रोकर/प्लेटफॉर्म का पंजीकरण अवश्य जांचें।
फर्जी वेबसाइटों के स्क्रीन पर दिखने वाले वर्चुअल मुनाफे को वास्तविक न समझें।
निकासी के नाम पर इनकम टैक्स, सिक्योरिटी डिपॉजिट या प्रोसेसिंग फीस जैसे अतिरिक्त शुल्क कभी न दें।
कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता या सिम कार्ड किसी अन्य को उपयोग के लिए न दें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत नजदीकी साइबर थाने, हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

