मजबूत इरादों की मिसाल: दोनों पैरों से लाचार, फिर भी अकेले ही केरल की वेम्बनाड झील को कचरा-मुक्त कर रहे हैं एन.एस. राजप्पन
कोट्टायम (केरल): जहाँ एक तरफ प्लास्टिक प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ केरल के कोट्टायम जिले के 70 से अधिक उम्र के बुजुर्ग एन.एस. राजप्पन ने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो, तो शारीरिक कमियां भी आपके रास्ते में रोड़ा नहीं बन सकतीं।
केरल के कोट्टायम जिले में रहने वाले एन.एस.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में राजप्पन जी के इस निस्वार्थ प्रयास की सराहना की थी और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के पूर्व प्रमुख एरिक सोल्हेम ने भी उनका वीडियो शेयर कर उनकी तारीफ की थी।
महज कुछ रुपयों की कमाई, पर मकसद बड़ा
राजप्पन जी रोजाना कई घंटों की कड़ी मेहनत से नाव भरकर प्लास्टिक की बोतलें चुनते हैं। इसे सुखाकर और कट्टों में भरकर वे स्थानीय स्क्रैप एजेंसी को बेचते हैं। एक किलो प्लास्टिक बेचने पर उन्हें मात्र ₹12 मिलते हैं।
पीएम मोदी और यूएन (UN) ने भी की सराहना
राजप्पन जी का यह कार्य तब दुनिया की नजर में आया जब एक स्थानीय फोटोग्राफर ने उनकी कहानी और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में उनके इस काम का जिक्र करते हुए उन्हें प्रेरणास्रोत बताया।
एक सीख जो सभी के लिए प्रेरणा है
एन.एस.

