Panchayat Corruption : फर्जी बिल और मास्टर रोल का खेल: पंचायत भवन बनवाने वाले ठेकेदार को नहीं मिला हक

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बांसवाड़ा: पंचायत भवन बनवाने वाले आदिवासी ठेकेदार को नहीं मिला भुगतान, फर्जी बिल और मास्टर रोल बनाकर सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप

बांसवाड़ा (राजस्थान): सरकार के वो दावे आज हवा हो गए जिसमे सरकार दिल्ली से एक रुपया भेजती है तो गरीब के पास वह पूरा पहुँचता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है, जहा गरीब की मेहनत का पैसा भी कुछ जालसाज़ दबा कर बैठ गए ऊपर से राजनीतिक धौस अलग। जी हां जिले के कुशलगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गोपालपुरा (वर्तमान नई ग्राम पंचायत गांदवन) में एक गरीब आदिवासी ठेकेदार से पंचायत भवन का निर्माण करवाने के बावजूद उसे बकाया राशि का भुगतान न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पंचायत अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मिलीभगत कर फर्जी बिल और मास्टर रोल तैयार करके लाखों रुपये का गबन कर लिया है। पीड़ित ठेकेदार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है और उसने इस संबंध में राष्ट्रपति महोदय को विशेष दया याचिका प्रस्तुत की है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता और पीड़ित ठेकेदार प्रभुलाल अड़ (पुत्र श्री रूपा अड़, निवासी ग्राम दरा) के अनुसार, वर्ष 2021 में तत्कालीन ग्राम पंचायत गोपालपुरा के अधिकारियों—अशोक निनामा (तत्कालीन सचिव), कमलेश जोशी (तत्कालीन सचिव), कनिष्ठ तकनीकी सहायक (JTA), और तत्कालीन सरपंच स्व. मानसिंह डाबी द्वारा उन्हें पंचायत भवन निर्माण कार्य का लिखित कार्यादेश दिया गया था।

प्रभुलाल ने पूरी ईमानदारी और तकनीकी माप के अनुसार भवन का निर्माण कार्य (छत, कॉलम, बीम, स्लैब, सीढ़ियां और बरामदा आदि) सफलतापूर्वक पूरा किया। कुल निर्माण कार्य की लागत 7,70,920/- रुपये बनती है, जिसमें से प्रार्थी को शुरुआत में केवल 65,000/- रुपये ही प्राप्त हुए। वर्तमान में उनकी 7,05,920/- रुपये (सात लाख पांच हजार नौ सौ बीस रुपये) की राशि मय उचित ब्याज बकाया है।

फर्जी बिल और मास्टर रोल से भुगतान उठाने का आरोप

पीड़ित का आरोप है कि कुल कार्य लागत में से केवल नाम मात्र का भुगतान देकर बाकी बची भारी-भरकम राशि हड़पने के लिए आरोपियों ने साजिशन फर्जी सामग्री आपूर्ति के बिल और फर्जी मास्टर रोल तैयार कर लिए। फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी धन का गबन कर लिया गया और जब प्रार्थी ने संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, तो अधिकारियों ने भ्रामक जवाब देकर मामले को दबाने का प्रयास किया।

प्रशासनिक अधिकारियों पर भी संरक्षण देने के आरोप

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर, बांसवाड़ा के निर्देश पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जिला परिषद बांसवाड़ा द्वारा खंड विकास अधिकारी (BDO) कुशलगढ़ से पत्रावली और जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। BDO की जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सचिवों और सरपंच द्वारा गबन किए जाने की बात स्पष्ट रूप से सिद्ध हो चुकी है।

हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जिला परिषद बांसवाड़ा द्वारा भ्रष्टाचारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है और उन्हें जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति देने से भी इनकार कर दिया गया है, जिससे उच्च स्तर पर प्रशासनिक संरक्षण मिलने का संदेह गहराता है।

कर्ज के बोझ तले दबा गरीब परिवार

प्रार्थी प्रभुलाल एक गरीब और आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। कार्य पूरा करवाने के लिए उन्होंने अपनी निजी भूमि गिरवी रखी और ब्याज पर कर्ज लेकर मिस्त्रियों, मजदूरों तथा अन्य साजो-सामान का भुगतान किया था। समय पर भुगतान न मिलने के कारण आज उनका परिवार भारी कर्ज, कंगाली और गंभीर मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना का शिकार है।

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राष्ट्रपति को भेजी गई विशेष गुहार

जिले के आला प्रशासनिक अधिकारीयों से लाख लिखित में मनुहार करने के बावजूद जब प्रभुलाल कही कोई न्याय नहीं मिला तो पीड़ित ने सीधे राष्ट्रपति महोदय को भेजी गई विशेष दया याचिका में निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. BDO कुशलगढ़ द्वारा प्रेषित गबन साबित करने वाली मूल जांच रिपोर्ट और संपूर्ण रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति प्रार्थी को उपलब्ध कराई जाए।

  2. दोषी कार्मिकों और जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध संपत्ति कुर्की की कानूनी कार्रवाई कर प्रार्थी की बकाया राशि 7,05,920/- रुपये मय उचित ब्याज दिलाई जाए।

  3. पद के दुरुपयोग, गबन और साक्ष्यों को छिपाने वाले सभी दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत एफ.आई.आर. (FIR) दर्ज कर उन्हें राजकीय सेवा से बर्खास्त किया जाए।

हालांकि देश में अच्छे दिनों वाली सरकार इस गरीब की कैसे मदद कर पाती है ये तो आने वाला वक्त ही बता पाएगा। 

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