रेरा का बड़ा फैसला: अखबार में विज्ञापन छपवाकर हड़पे 60 लाख के दो फ्लैट, मोजिका रियल स्टेट पर कसा कानूनी शिकंजा
जयपुर : राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) ने मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों का प्रचार कराने के बाद बार्टर सौदे (Barter Deal) के तहत तय फ्लैटों का कब्जा रोकने वाले बिल्डर पर कड़ा कानूनी डंडा चलाया है। रेरा की सदस्य रश्मि गुप्ता की पीठ ने 'डीबी कॉर्प लिमिटेड' (दैनिक भास्कर) की शिकायत पर एकतरफा सुनवाई करते हुए जयपुर के प्रोजेक्ट 'मोजिका अल्टिमा' के प्रमोटर मैसर्स मोजिका रियल स्टेट एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को दोषी पाया है।
क्या है पूरा विवाद?
80 लाख का विज्ञापन करार: मोजिका रियल स्टेट ने अपने प्रोजेक्ट 'मोजिका अल्टिमा' के प्रचार-प्रसार के लिए डीबी कॉर्प लिमिटेड के साथ अनुबंध किया था। इसमें ₹80,08,533 का कुल पैकेज तय हुआ था—जिसमें ₹20,02,133 नकद और ₹60,06,400 बार्टर कंपोनेंट था।
बदले में दो फ्लैट्स: बार्टर डील (₹60.06 लाख) के एवज में प्रमोटर ने प्रोजेक्ट के फ्लैट नंबर 143 और 1043 डीबी कॉर्प या उसके नॉमिनी को देना स्वीकार किया था।
समय पर नहीं दिया कब्जा: समझौते के तहत 31 जनवरी 2022 तक पूर्णता प्रमाणपत्र (CC) लेकर कब्जा सौंपना अनिवार्य था। मीडिया समूह ने विज्ञापन सेवाएं पूरी कर दीं, लेकिन बिल्डर ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद भी कब्जा नहीं सौंपा।
रेरा की महत्वपूर्ण विधिक व्यवस्था
अदालत में शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऋषि राज माहेश्वरी और दीक्षांत जैन ने पैरवी की। रेरा ने स्पष्ट किया कि RERA कानून की धारा 2(1)(d) के तहत आवंटी (Allottee) की परिभाषा में वह हर व्यक्ति या संस्थान शामिल है, जिसे किसी भी वैध प्रतिफल—चाहे नकद हो या सेवा के बार्टर विनिमय—के बदले यूनिट आवंटित की गई हो।
रेरा कोर्ट के मुख्य निर्देश:
कब्जा और ब्याज: मोजिका रियल स्टेट डीबी कॉर्प को फ्लैट नंबर 143 और 1043 का वैध भौतिक कब्जा सौंपेगी तथा ₹60.06 लाख पर 31 जनवरी 2022 से 10.80% की दर से विलंब ब्याज देगी।
समय-सीमा: आदेश अपलोड होने के 15 दिनों में शिकायतकर्ता CA द्वारा ऑडिटेड बिल सौंपेगा, जिसके बाद प्रमोटर को 45 दिनों के भीतर पूरे आदेश का पालन करना होगा।


