प्रशासनिक आदेश ठेंगे पर: तहसीलदार के नोटिस को दरकिनार कर चरागाह भूमि पर चला ट्रैक्टर
बांसवाड़ा/राजस्थान।। एक तरफ राज्य सरकार और प्रशासन चरागाह (गौचर) भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर भू-माफिया और दबंग प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। ताजा मामला बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड अंतर्गत उप-तहसील छोटी सरवा के ग्राम पंचायत व पटवार हल्का वरसाला से सामने आया है, जहाँ 14 लोगों द्वारा सरकारी चरागाह भूमि पर जबरन कब्जा कर ट्रैक्टर से जुताई (हांकने) का संगीन मामला प्रकाश में आया है।
कानून को ठेंगा: तहसीलदार के पाबंद आदेश के बाद भी जबरन कब्जा
मिली जानकारी के अनुसार, वरसाला गांव में चरागाह भूमि को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। इस पर संज्ञान लेते हुए कुशलगढ़ तहसीलदार शंकरलाल मईडा की अदालत और पाटन थाना पुलिस ने गत 9 जुलाई को धारा 126, 170 (BNSS) के तहत मामला दर्ज कर दोनों पक्षों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु पाबंद (नोटीस जारी) किया था।
इसके बावजूद, एक पक्ष के 14 लोगों ने प्रशासनिक पाबंदी की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए चरागाह भूमि पर ट्रैक्टर चलाकर जबरन कब्जा कर लिया।
ग्रामीणों ने पाटन थाने पहुँचकर गुहार लगाई
इस घटना से आक्रोशित वरसाला गांव के दर्जनों ग्रामीण मंगलवार को पाटन पुलिस थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों ने तहसीलदार द्वारा जारी आदेश की प्रति सौंपते हुए मीडिया के सामने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि जिस जमीन पर मवेशी चरते हैं, उस पर एक ही परिवार के लोगों ने कानून को ताक पर रखकर हल चला दिया है।
शिकायत में नामजद 14 अतिक्रमी (गांव करमदी, वरसाला):
बादर पुत्र वरसिंह राणा, गजु पुत्र लालु राणा, नरु पुत्र लालु राणा, रंगु पुत्र बारजी राणा, दिलिप पुत्र रंगु राणा, लखजी पुत्र बारजी राणा, गलीया पुत्र लखजी राणा, रमेश पुत्र बारजी राणा, बदरु पुत्र बारजी राणा, वालहिंग पुत्र बारजी राणा, कचरु पुत्र बारजी राणा, प्रकाश पुत्र वरसिग राणा, रामचंद्र पुत्र कचरु राणा एवं मुकेश पुत्र लखजी। (ये सभी एक ही परिवार से ताल्लुक रखते हैं)।
क्या कागजों तक सिमट कर रह जाएगी कार्रवाई?
क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार थोड़ी सख्ती दिखाए, तो कुशलगढ़ व आसपास के इलाकों में हजारों बीघा सरकारी और चरागाह भूमि को भू-माफियाओं से मुक्त कराया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
क्या पटवारी, गिरदावर और पाटन थाना पुलिस इन बेखौफ अतिक्रमियों पर ठोस कानूनी कार्रवाई करेंगे?
या फिर प्रशासनिक आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा!
