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Bikaner Railway रेलवे में 104 करोड़ का सामान गायब: चोरी करे यात्री, तनख्वाह कटे 10 हज़ार के कर्मचारी की!

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रेलवे के एसी कोचों से करोड़ों की चोरी: चोर कोई और, सजा पा रहा 10 हज़ार का संविदा कर्मचारी!

बीकानेर | समाचार डेस्क। भारतीय रेल के वातानुकूलित (AC) डिब्बों से हर साल करोड़ों रुपये का सामान गायब हो जाता है। हाल ही में एक आरटीआई (RTI) से सामने आई रिपोर्ट ने चौंकाने वाली सच्चाई उजागर की है—जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच रेल के एसी डिब्बों से 1.27 करोड़ से अधिक बेडशीट, तौलिए, कंबल और तकिए गायब हो गए, जिनकी कुल कीमत 104 करोड़ रुपये से भी अधिक है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि पूरे देश में उत्तर पश्चिम रेलवे का बीकानेर मंडल इस सूची में सबसे ऊपर है, जहाँ से लगभग 25.76 लाख सामान चोरी हुए हैं।

आंकड़ों के पीछे की खौफनाक सच्चाई

अक्सर हम इन करोड़ों के आंकड़ों को एक साधारण खबर मानकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन इन आंकड़ों के पीछे एक कड़वा सच छुपा है—ठेके पर काम करने वाले रेल कर्मचारियों का दर्द।

ट्रेन में यात्रा के दौरान यात्रियों की सहूलियत के लिए तैनात अटेंडेंट (कमर्चारी) मात्र 10,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर दिन-रात ड्यूटी करते हैं। रेलवे में यदि किसी एसी कोच से बेडशीट, तौलिया या अन्य सामान चोरी हो जाता है, तो उसकी भरपाई अक्सर इन कम वेतन पाने वाले संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों की जेब से की जाती है।

"साहब, अपना मोबाइल साथ ले जाइए, चोरी हो गया तो भरपाई हमारी तनख्वाह से होगी। चोरी कोई और करता है, लेकिन सजा हमें भुगतनी पड़ती है।"

एक ट्रेन अटेंडेंट की व्यथा

रेलवे के कदम और असली चुनौती

चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने निम्नलिखित उपाय शुरू किए हैं:

  • सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की निगरानी

  • कोच मित्र ऐप के ज़रिए तुरंत शिकायत दर्ज करना

  • कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन (Police Verification)

  • यात्रियों के लिए जागरूकता अभियान

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या ये कदम उन निर्दोष कर्मचारियों को सुरक्षा दे पा रहे हैं जो हर सफर में इस खौफ के साथ ड्यूटी करते हैं कि किसी यात्री की लापरवाही या चोर की चालाकी का खमियाजा उनकी आधी तनख्वाह काट कर न वसूला जाए?

आप क्या सोचते हैं?

ईमानदारी से काम करने वाले इन कर्मचारियों के लिए एक न्यायसंगत व्यवस्था की सख्त जरूरत है, जहाँ अपराधी को सजा मिले न कि मजदूरी करने वाले गरीब कर्मचारी को।

सवाल जो सोचने पर मजबूर करता है:

क्या यात्रियों की लापरवाही या चोरी का हर्जाना 10 हज़ार की नौकरी करने वाले कर्मचारियों के वेतन से काटना सही है? या रेलवे को ऐसी सख्त तकनीक और व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे असली दोषी पकड़े जाएँ?

अपनी राय कमेंट में ज़रूर साझा करें।

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