जंगली झाड़ियों के बीच खौफ के साए में मरीज, 8 बजे के समय पर 9:30 बजे पहुंचता है स्टाफ: बांसवाड़ा का सियापुर PSC बना 'भूतिया खंडहर'
सियापुर (बांसवाड़ा) : बांसवाड़ा जिले का सियापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PSC) इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के कारण मरीजों के इलाज की जगह हादसों का केंद्र बनता नजर आ रहा है। आलम यह है कि देखरेख के अभाव में अस्पताल परिसर और खिड़कियों तक घनी जंगली झाड़ियां और बेलें फैल चुकी हैं, जिससे पूरा अस्पताल एक 'भूतिया खंडहर' में तब्दील हो चुका है। घनी झाड़ियों के कारण परिसर में सांप, बिच्छू और जहरीले जीवों का सीधा खतरा बना रहता है, लेकिन जिम्मेदार प्रशासन बेखबर सोया हुआ है।
अस्पताल की दुर्दशा यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि यहां तैनात कर्मचारियों की मनमानी भी चरम पर है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से सुबह-सुबह इलाज की उम्मीद में आने वाले मरीज और उनके परिजन घंटों तड़पने को मजबूर रहते हैं, जबकि स्टाफ अपनी मर्जी से सुबह 9:30 बजे तक आराम से पहुंचता है।
इस मामले पर जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय से संपर्क किया गया, तो अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अस्पताल खुलने और कर्मचारियों की उपस्थिति का आधिकारिक समय सुबह ठीक 8:00 बजे निर्धारित है।
समय पर डॉक्टरों व स्टाफ की गैरमौजूदगी और अस्पताल परिसर में मंडराता जहरीले जीवों का खौफ, सीधे तौर पर आम जनता की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। इस बदहाली और लेटलतीफी को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग से मांग की है कि लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और अस्पताल परिसर की सफाई कराकर चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।
मुख्य बिंदु :
अस्पताल बना झाड़ियों का आगोश: खिड़कियों और परिसर में उगी बेलों से जहरीले जानवरों का खतरा बढ़ा।
समय पालन में घोर लापरवाही: सुबह 8:00 बजे के तय समय के बजाय 9:30 बजे पहुंच रहा है स्टाफ।
मरीजों की फजीहत: दूर-दराज से आए मरीज इलाज के अभाव में तड़पने को मजबूर।
CMHO कार्यालय का बयान: अस्पताल खुलने का अधिकृत समय सुबह 8:00 बजे फिक्स।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: लापरवाह स्टाफ पर कार्रवाई और परिसर की तुरंत सफाई की मांग।
