कुशलगढ़, बांसवाड़ा : कुशलगढ़ नगर पालिका चुनाव 2026 के वार्ड नंबर 14 में एक ऐसा सियासी ड्रामा देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र की राजनीति के समीकरण बदल दिए हैं। कांग्रेस के अभेद्य किले और बाहुबली चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रजनीकांत खाब्या को भाजपा के एक बेहद साधारण कार्यकर्ता कलीमुद्दीन बोहरा ने कड़ी टक्कर देकर बैकफुट पर ला खड़ा किया।
सज्जा, संसाधन और दावतों से लैस खाब्या के चुनावी रथ के सामने कलीमुद्दीन ने बिना किसी शोर-शराबे और लवाजमे के, सादगी और घर-घर जाकर जनसंपर्क का रास्ता चुना। नतीजे आए तो पूरा मतगणना हॉल सन्न रह गया—दोनों प्रत्याशियों के खाते में बिल्कुल बराबर वोट दर्ज हुए।
तीन बार गिनती, फिर भी मुकाबला टाई
शुक्रवार को हुई मतगणना के दौरान सांसें थमा देने वाला मंजर रहा। बढ़त और बराबरी के रोमांचक दौर के बाद जब अंतिम परिणाम टाई हुआ, तो निर्वाचन अधिकारी ने नियमों के तहत दोबारा और तीबारा गिनती करवाई।
पहला राउंड: रजनीकांत खाब्या 12 वोट से आगे।
दूसरा राउंड: कलीमुद्दीन ने अंतर पाटकर बराबरी की।
तीसरा राउंड: दोनों प्रत्याशियों को मिले एक समान मत।
पुनर्मतगणना (2 बार और): हर बार परिणाम टाई ही रहा।
इसके बाद नियमानुसार पर्ची (लॉटरी) से भाग्य का फैसला करने का निर्णय लिया गया। एक बच्चे द्वारा जार से निकाली गई पर्ची में रजनीकांत खाब्या का नाम निकला, जिससे कांग्रेस खेमे को जीत तो मिली, लेकिन यह जश्न से ज्यादा राहत की सांस थी।
सियासी सबक और जनमत का संदेश
इस परिणाम के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं:
| पक्ष | चुनावी स्थिति व असर |
| कांग्रेस (रजनीकांत खाब्या) | पर्ची के सहारे सीट तो बच गई, लेकिन ब्लॉक अध्यक्ष के गढ़ में इस तरह की टक्कर संगठन के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है। |
| भाजपा (कलीमुद्दीन बोहरा) | हारकर भी नैतिक जीत दर्ज की। सीमित संसाधनों के बावजूद जनाधार मजबूत कर पार्टी में एक बड़ा कैडर चेहरा बनकर उभरे। |
स्थानीय मतदाताओं के बीच यह मुकाबला अब "धनबल बनाम जनबल" की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। पर्ची के फैसले ने खाब्या को पार्षद पद तो दिला दिया, लेकिन कलीमुद्दीन बोहरा ने सादगी के दम पर वार्ड की राजनीति में अपनी एक मजबूत और अलग छाप छोड़ दी है।

