मध्यप्रदेश से बड़ी खबर: जब 60 घंटे की मशक्कत और भारी-भरकम मशीनें भी नहीं डिगा पाईं 'खड़े हनुमान जी' की प्रतिमा, विज्ञान भी पड़ा बौना!
उज्जैन : 'कलयुग में चमत्कार को ही नमस्कार है'—यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई है। इस दौर में जहां इंसान हर घटना के पीछे तर्क और विज्ञान तलाशता है, वहीं मध्यप्रदेश के धार्मिक नगर उज्जैन से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने वैज्ञानिकों, प्रशासन और आम जनता, सभी को अचरज में डाल दिया है।
सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत उज्जैन के प्रसिद्ध सती गेट स्थित लगभग 170 साल पुराने 'खड़े हनुमान जी' मंदिर को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। योजना के अनुसार, प्रतिमा को पूरे आदर के साथ टंकी चौक पर विस्थापित (शिफ्ट) किया जाना था। श्रद्धालुओं ने भारी मन से भगवान को अंतिम महाआरती के साथ भावुक विदाई भी दे दी थी।
60 घंटे का कड़ा प्रयास, पर हनुमान जी नहीं हिले एक इंच
असली चमत्कार तब शुरू हुआ जब प्रशासन ने आधुनिक मशीनरी और क्रेन की मदद से प्रतिमा को उठाने का काम प्रारंभ किया। लगातार 60 घंटे तक तमाम भारी मशीनों और आधुनिक उपकरणों के प्रयोग के बावजूद हनुमान जी की प्रतिमा अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं डिगी!
एक के बाद एक, कुल तीन बार प्रतिमा को हटाने के कड़े प्रयास किए गए, लेकिन हर बार प्रशासन और इंजीनियरों के हाथ सिर्फ नाकामी ही लगी। बड़ी-बड़ी क्रेन और मशीनें पस्त हो गईं, मगर पवनपुत्र हनुमान जी की प्रतिमा अपने स्थान पर अडिग रही।
अब होगी स्कैनिंग, क्षेत्र में कौतूहल और भक्ति का माहौल
लगातार असफलता के बाद अब प्रशासन प्रतिमा के निचले ढांचे की विशेष स्कैनिंग कराने की तैयारी कर रहा है ताकि यह समझा जा सके कि आखिर प्रतिमा किस आधार पर टिकी है।
स्थानीय लोगों और रामभक्तों का कहना है कि यह केवल आस्था की ताकत नहीं, बल्कि साक्षात ईश्वरीय चमत्कार है। जिस विज्ञान पर इंसान को इतना अहंकार है, वह भगवान हनुमान जी की भक्ति और शक्ति के आगे बौना साबित हो चुका है। फिलहाल पूरे इलाके में यह घटना चर्चा का केंद्र बनी हुई है और लोग इसे भगवान का अलौकिक चमत्कार मानकर नतमस्तक हो रहे हैं।

