15 साल की कठोर साधना! जब घुटनों के बल पहुंचे भक्त का स्वागत करने स्वयं आए रामदेवरा गादीपति भोम सिंह जी

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अद्भुत आस्था! रामदेवरा गादीपति भोम सिंह जी तंवर ने सकारामजी का किया भव्य स्वागत, घुटनों के बल 15वीं धोक यात्रा पूर्ण कर रचा इतिहास

रामदेवरा (जैसलमेर)। राजस्थान की पावन धरा पर भक्ति और अटूट श्रद्धा की एक ऐसी अनूठी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी को भावविभोर कर दिया। लोक देवता बाबा रामदेव जी के प्रसिद्ध धाम रामदेवरा में एक भक्त ने अपनी 15वीं धोक यात्रा घुटनों के बल चलकर पूरी की। इस कठिन तपस्या को देखकर स्वयं रामदेवरा के 22वें गादीपति भोम सिंह जी तंवर भावुक हो गए और उन्होंने आगे बढ़कर इस अनन्य भक्त का भव्य स्वागत किया।

कठिन मन्नत और अटूट श्रद्धा: घुटनों के बल रामदेवरा पहुंचे भक्त सकारामजी, रामदेवरा गादीपति ने भावुक होकर जताया सम्मान

15 वर्षों की कठिन तपस्या और अटूट संकल्प

हम बात कर रहे हैं सकारामजी की, जो पिछले 15 सालों से लगातार भादवा मेले के अवसर पर अपने गाँव से रामदेवरा तक की दूरी घुटनों के बल तय करते हैं। कड़कती धूप, पथरीली जमीन, पैरों के छाले और घुटनों के दर्द की परवाह किए बिना सकारामजी के मुख पर केवल एक ही नाम होता है—"जय बाबा री"|

सकारामजी ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व आए एक बड़े संकट के समय उन्होंने बाबा के दरबार में मन्नत मांगी थी। संकट टलने के बाद से वे निरंतर अपनी इस कठोर मन्नत को निभा रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने अपनी 15वीं यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण की।

गादीपति भोम सिंह जी तंवर ने किया सम्मानित

सकारामजी की इस भक्ति की जानकारी मिलते ही बाबा रामदेव जी के वंशज व गादीपति भोम सिंह जी तंवर स्वयं मंदिर परिसर पहुंचे। उन्होंने सकारामजी को गले लगाया, शॉल ओढ़ाकर, फूल-मालाओं, पवित्र भभूति और बाबा के प्रसाद से उनका अभिनंदन किया।

गादीपति भोम सिंह जी तंवर का संदेश:

"सकारामजी जैसे भक्त ही हमारे सनातन धर्म और बाबा रामदेव जी की दिव्य शक्ति के सच्चे प्रतीक हैं। आज के दौर में जहाँ लोग छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं, वहीं 15 साल से घुटनों के बल चलकर यात्रा करना भक्ति की पराकाष्ठा है। यह समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।"

गादीपति जी के हाथों सम्मान और आशीर्वाद पाकर सकारामजी की आँखों में आंसू छलक आए। उन्होंने कहा कि स्वयं गादीपति जी से मिला यह स्नेह उनकी 15 वर्षों की तपस्या का सबसे बड़ा फल है।

समर्पण और भक्ति का अनूठा संदेश

शास्त्रों में शरीर को तपाकर की जाने वाली भक्ति को सर्वोपरि माना गया है। सकारामजी की इस कठिन यात्रा ने रामदेवरा पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं के दिलों को छू लिया। गादीपति भोम सिंह जी द्वारा एक साधारण भक्त का इस प्रकार सम्मान करना यह संदेश देता है कि बाबा रामदेव जी के दरबार में भक्ति का भाव ही सर्वोपरि है। सकारामजी की यात्रा पूर्ण होने पर संपूर्ण रामदेवरा परिसर "जय बाबा री" के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

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