मप्र में गरीबों को घटिया चावल का मामला हाईकोर्ट पंहुचा
भोपाल।।
मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट से जुलाई और अगस्त 2015 की अवधि
में रेलवे के जरिये 2500 मैट्रिक टन चांवल नागरिक आपूर्ति निगम विदिशा भेजा
गया था उक्त चांवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये उपभोक्ताओं को वितरित
किया जाना था।
भेजे गये चांवल का आपूर्ति निगम के अधिकारियों द्वारा परिक्षण किये जाने पर
चावल निर्धारित मापदण्ड के अनुसार गुणवत्ताहीन एवं अमानक स्तर का पाया
जाने पर उसको सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरित किये जाने पर
रोक लगा दी गई थी। इन विसंगतियों के चलते कस्टम मिलिंग का अनुबंध करने वाले
राईस मिलर्स एवं आपूर्ति निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों की संलिप्तता के
कारण करोडों रूपयों की क्षति शासन को पहुचाते हुये भारी घोटाला किया गया
है।
इस मामले को आधार बनाकर पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता आनंद ताम्रकार ने
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर की है याचिका क्रमांक
डब्ल्यू. पी.21268/2015/8/12/2015 जिसे जस्टिस श्री रविशंकर झा की अदालत ने
9/12/2015 को विचारार्थ स्वीकार कर लिया।
आवश्यक वस्तु अधिनियम तथा मध्यप्रदेश चांवल वितरण एवं नियत्रंण आदेश 1973
के अधीन प्रस्तुत की गई इस याचिका में प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन
महाप्रबंधक, मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम भोपाल, जिला प्रबंधक
मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट तथा कलेक्टर को प्रतिवादी बनाया
गया है। मामले की सुनवाई 10 जनवरी 2016 को नियत की गई है याचिकाकर्ता की ओर
से डाॅ. अनुवाद श्रीवास्तव, संजीत कनौजिया, राहुल राय एवं रविन्द्र पाराशर
अधिवक्ता पैरवी कर रहे हैं।
