केजरीवाल को यह सारी बाते मालूम थी इसलिए उन्होंने जेठमलानी का सहयोग माँगा ..

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राम जेठमलानी का एक और विस्फोटक इंटरव्यू। कुछ नई दिलचस्प फुटकर बातें भी पता चलीं। मसलन:
1. अरुण जेटली वकालत के शुरुआती दिनों में राम जेठमलानी की कोट संभाला करते थे।
2. भाजपा के चुनावी वायदे के मुताबिक काला धन विदेशों से वापस ला पाने में अरुण जेटली की विफलता पर राम जेठमलानी का एक आलेख जब 'संडे गार्जियन' ने छापने से इन्कार कर दिया, जिस अख़बार के बोर्ड के वह खुद चेयरमेन भी थे, तब राम जेठमलानी के उस आलेख को इंडियन एक्सप्रेस ने 13 लाख रुपये लेकर विज्ञापन के रूप में, 28 अप्रैल, 2015 को छापा था।
3. अरुण जेटली ने राम जेठमलानी को वाजपेयी सरकार में कानून मंत्री के पद से हटवाने के लिए वाजपेयी के कान भरे थे। इस्तीफे के लिए जसवंत सिंह का फोन मिलने पर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर कार रोककर सड़क किनारे के किसी पी.सी.ओ. से फैक्स करके जेठमलानी ने प्रधानमंत्री को इस्तीफा भेजा था। तब से लेकर आज तक जेठमलानी ने वाजपेयी का चेहरा नहीं देखा।
4. जेठमलानी को इस बात का क्षोभ भी है कि जिस आडवाणी को उन्होंने हवाला कांड के आरोपों से बेदाग निकाला था, उसी आडवाणी ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी से निकाल दिया और जब आडवाणी ने हजार पृष्ठों की अपनी आत्मकथा लिखी, तो जेठमलानी का जिक्र बस एक वाक्य में यह किया कि 'उनका जन्म शिकारपुर में हुआ'।
5. जो नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले जेठमलानी के घर आया करते थे और जेठमलानी से हर तरह का सहयोग-सलाह मांगा करते थे, वही मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद ऐसे अहसान फरामोश हो गए कि एक बार भी कभी फोन तक नहीं किया उनको।
6. अरुण जेटली नहीं चाहते कि भाजपा में बौद्धिक रूप से उनसे अधिक श्रेष्ठ कोई व्यक्ति नरेन्द्र मोदी के करीब आ पाए, इसलिए वह राम जेठमलानी (और सुब्रह्मण्यम स्वामी, जैसों) के खिलाफ नरेन्द्र मोदी के कान भरते रहते हैं, ताकि प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण मामलों में पूरी तरह केवल उन पर ही निर्भर रहें।
7. केजरीवाल को यह सारी पृष्ठभूमि मालूम थी और इसलिए उसने अपने खिलाफ अरुण जेटली के मानहानि के मुकदमे में बचाव के लिए जेठमलानी का सहयोग माँगा और वह महज 1 रुपये की फीस पर राजी हो गए।
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