ये हैं चमत्कारी मंदिर, देखते-देखते हो जाता है गायब

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जाने दिव्य एवं चमत्कारी मंदिरों के बारें में 
    चमत्कार अक्सर आखों का धोखा और दूसरे की हाथ की सफाई होती है। लेकिन अगर हम आपको कहें कि देश में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जहां सच में चमत्कार होते हैं तो इस बारे में क्या कहेंगी? आप भी चमत्कार को नमस्कार कहेंगे। हम आपको बताने जा रहें देश में कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में जो किसी चमत्कार से कम नहीं, जानिए:-
गायब हो जाता है यह मंदिर
    आप यह कल्पना नहीं कर सकते लेकिन यह बात सच है कि यह मंदिर पल भर के लिए गायब हो जाता है। फिर थोड़ी देर बाद अपने आप ही उसी जगह वापस भी जाता है। यह मंदिर कावी में स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर है जो वडोदरा से 40 मील की दूरी पर अरब सागर के बिल्कुल सामने है। खास बात यह है कि आप इस मंदिर की यात्रा तभी कर सकते हैं जब समुद्र में ज्वार कम हो। ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है।
यहां शराब पी जाते हैं भगवान
     मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से करीब 8 कि.मी. दूर कालभैरव मंदिर स्थित है। भगवान कालभैरव को प्रसाद के तौर पर केवल शराब ही चढ़ाई जाती है। शराब से भरे प्याले कालभैरव की मूर्ति के मुंह से लगाने पर वह देखते ही देखते खाली हो जाते हैं। मंदिर के बाहर भगवान कालभैरव को चढ़ाने के लिए देसी शराब की आठ से दस दुकानें लगी हैं।
     बताया जाता है कि चारों वेदों के रचियता भगवान ब्रह्मा ने जब पांचवें वेद की रचना का फैसला किया, तो उन्हें इस काम से रोकने के लिए देवता भगवान शिव की शरण में गए। ब्रह्मा जी ने उनकी बात नहीं मानी। इस पर शिवजी ने क्रोधित होकर अपने तीसरे नेत्र से बालक बटुक भैरव को प्रकट किया। इस उग्र स्वभाव के बालक ने गुस्से में आकर ब्रह्मा जी का पांचवां मस्तक काट दिया। इसके बाद ब्रह्म हत्या के पाप को दूर करने के लिए वह अनेक स्थानों पर गए। लेकिन उन्हें इससे छुटकारा नहीं मिल पाया। तब भैरव ने भगवान शिव की आराधना की। शिव ने भैरव को बताया कि उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर ओखर श्मशान के पास तपस्या करने से उन्हें इस पाप से मुक्ति मिलेगी। तभी से यहां काल भैरव की पूजा हो रही है।
सर्दी में यहां गर्म होता है पानी
    यह मंदिर हिमाचल की ठंडी वादियों में स्थित है। खास बात यह है कि ठंडी जगह पर होने के बावजूद भी इस मंदिर में गर्म पानी का एक कुंड है। यह मंदिर है हिमाचल प्रदेश का ततवानी मंदिर। यह हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से 25 कि.मी. दूर ततवानी में स्थित है। यह मंदिर धर्मशाला को गर्म पानी के झरनों और कुंडों के लिए जाना जाता है। इस कुंड में स्नान के बाद ही भक्त मंदिर में प्रवेश कर सकता है। माना जाता है कि इस पानी में शरीर के लिए कई लाभदायक तत्व मौजूद हैं।
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