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जानिये तिरंगे से सम्बंधित कुछ खास जानकारी

  नई दिल्ली। शायद ही किसी को पता हो कि तिरंगा पहली बार कब और कहां फहराया गया था, राष्ट्रध्वज फटने पर क्या किया जाता है। पहले इसका रूप क्या था। तो आज हम आपको रिपब्लिक डे के मौके पर तिरंगे से जुड़े कुछ फैक्ट्स बताने जा रहे हैं।
-शहीद हुए जवानों को सम्मान देने के लिए उनका पार्थिव राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा जाता है। इसमें केसरिया पट्टी को सिर की तरफ और हरी पट्टी को पैरों की तरफ रखा जाता है। शहीद के अंतिम संस्कार से पहले तिरंगे को उतार लिया जाता है। उतारे गए झंडे को सम्मान के साथ नष्ट कर दिया जाता है।
-राष्ट्रीय ध्वज को पिंगली वैंकेया ने डिजाइन किया था। वेंकैया ने इसके लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से सलाह ली और उन्होंने तिरंगे के बीच में अशोक चक्र रखने की सलाह दी जो पूरे भारत को एक सूत्र में बांधने का संकेत बने। उन्होंने 5 सालों तक 30 देशों के झंडों पर रिसर्च किया और इस रिसर्च के बाद भारत को राष्ट्रध्वज के तौर पर तिरंगा मिला।
-यह तिरंगे का छठवां रूप है। इसे 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। यह सभा 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पहले ही आयोजित की गई थी।
-जब तिरंगा फट जाए या उसका रंग हल्का पड़ जाए तो उसे फहराया नहीं जा सकता ऐसा करना इसका अपमान माना जाता है। ऐसा होने पर उसे या तो पवित्र जल में प्रवाह कर दिया जाता है या गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है।
-सबसे पहले सात अगस्त 1906 को लाल, पीले और हरे रंग की हॉरिजेंटल पट्टियों वाले झंडे को फहराया गया था। यह झंडा पारसी बागान चॉक (ग्रीन पार्क) कोलकाता में फहराया था।
-किसी राष्ट्र विभूति के निधन और देश में राष्ट्रीय शोक घोषित होने के बाद झंडे को झुका दिया जाता है।
-अभी जो झंडा अपनाया जा रहा है उसे 22 जुलाई को अपनाया गया था। हमारे झंडे की चौड़ाई का अनुपात इसकी लंबाई के साथ 2 और 3 का होता है।
-झंडे में बना अशोक चक्र नीले रंग का होता है। इसका व्यास सफेद पट्टी की चौड़ाई के बरबर होता है। इस तिरंगे से पहले जो देश में जो तिरंगा अपनाया जा रहा था उसमें झंडे की जगह चरखा हुआ करता था।
-26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में एंमेंडमेंट किया गया था। इसके बाद लोगों को आम दिनों में भी झंडा फहराने की अनुमति मिल गई थी।
-रांची में 23 जनवरी 2016 को सबसे ऊंचा झंडा फहराया गया। इसका साइज 66X99 था। इसे जमीन से 493 फीट ऊंचाई पर फहराया गया। राष्ट्रपति भवन में एक छोटा झंडा लगा हुआ है। इस झंडे का स्तंभ सोने का है। इस पर हीरे जवाहरात जड़े हुए हैं।