ऐतिहासिक फैसला: भील समग्र विकास परिषद कुशलगढ़ का सपना होगा साकार, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने तुरंत दिए भूमि आवंटन के निर्देश
बांसवाड़ा/कुशलगढ़/राजस्थान।। "जमीन हमारी, मेहनत हमारी, अब हक भी हमारा" के बुलंद नारे के साथ भील समग्र विकास परिषद, कुशलगढ़ के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। भील समाज की दशकों पुरानी मांग पर प्रदेश के कैबिनेट राजस्व मंत्री श्री हेमंत जी मीणा ने संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित एक्शन लिया है।
राजस्व मंत्री से शिष्टाचार मुलाकात और ज्ञापन
भील समाज के आदरणीय रूपजी भाई बारिया के कुशल मार्गदर्शन में भील समाज सुधार समिति के अध्यक्ष डॉ. वजहींग मईडा ने कैबिनेट राजस्व मंत्री श्री हेमंत जी मीणा से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिषद की वर्षों पुरानी मांग को लेकर एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा, इस पर राजस्व मंत्री श्री हेमंत मीणा जी ने स्वयं संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर को त्वरित कार्रवाई के निर्देश (मार्क) भी दर्ज किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
भील समग्र विकास परिषद कुशलगढ़ के भवन के पीछे स्थित लगभग 0.4857 हेक्टेयर चारागाह भूमि पर परिषद का पिछले कई दशकों से कब्जा है। इस मैदान का उपयोग समाज द्वारा अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाता है, जैसे:
प्रतिवर्ष समाज की खेल-कूद प्रतियोगिताएं।
मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए प्रतिभा सम्मान समारोह।
सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह।
हर साल 9 अगस्त को मनाया जाने वाला भव्य "विश्व आदिवासी दिवस" समारोह।
चूँकि यह जमीन अभी तक तकनीकी रूप से आवंटित नहीं थी, इसलिए भविष्य में इस पर भू-माफियाओं की नजर पड़ने और बच्चों से खेल का मैदान छिनने का बड़ा खतरा मंडरा रहा था। इसी को देखते हुए इसे "खेल मैदान" के रूप में परिषद के नाम आवंटित करवाने की मांग की गई थी।
मंत्री जी का 'ऑन द स्पॉट' एक्शन, जुलाई में पूरा होगा काम
जननायक की छवि को चरितार्थ करते हुए राजस्व मंत्री श्री हेमंत मीणा ने मामले की गंभीरता को तुरंत समझा। उन्होंने बिना किसी देरी के मौके से ही बांसवाड़ा जिला कलेक्टर से दूरभाष पर सीधी वार्ता की। मंत्री जी ने स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं कि जुलाई माह के भीतर-भीतर हर हाल में यह भूमि 'भील समग्र विकास परिषद' के नाम आवंटित हो जानी चाहिए।
मंत्री जी के इस त्वरित और ऐतिहासिक निर्णय के बाद पूरे भील समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है। समाज के लोगों ने राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, डॉ. वजहींग मईडा और रूपजी बारिया के इस त्रिकोणीय प्रयासों और नेतृत्व की जमकर सराहना की है, जिन्होंने समाज की धरोहर को हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया।


