मुंबई मे रमेश वालुंज मंदिर में बैठे बैठे समुद्र की तरफ देख रहे थे, तभी उन्होंने help-help की आवाजें सुनी, तुरन्त उन्होंने बिना सोचे समझे उन तीन लड़कियों को बचाने के लिए समुद्र में छलांग लगा दी जो सेल्फी लेती लेती दुर्भाग्यवश नीचे समुद्र में बह गयी थी. तीनो लड़कियां जो Baiganwadi in Govandi की रहने वाली हैं यहाँ समुद्र के किनारे सेल्फी ले रही थी, तरन्नुम अंसारी (18), अंजुम खान (19) और मस्तुरी खान (19) जो सहेलियां हैं उन्होंने शनिवार को बांद्रा फोर्ट घुमने का कार्यकर्म बनाया, वे तीनो एक पत्थर पर खड़ी होकर सेल्फी ले रही थी अचानक पीछे से आती एक तेज लहर ने उनको लपेटे में ले लिया. रमेश वालुंज जो पेशे से ड्राईवर हैं उन्होंने अपनी बहादुरी से 2 लड़कियों को बचा लिया पर 1 लड़की और खुद रमेश पानी में बह गये और ये रिपोर्ट लिखे जाने तक उनको खोजा नही जा सका है, वे साढ़े 10 बजे घर से निकले थे और अब नही मिल रहे हैं :- रमेश की पत्नी कल्पना ने रोते हुए बताया, रमेश के खुद के भी तीन बच्चे हैं.
अब पढ़ते हैं देश की मीडिया और ऐसी घटनाओं पर उनकी रिपोर्टिंग का एक छोटा सा विश्लेषण :-
जो भी घटित हुआ बेहद दुखद है और ऐसे हादसे नही होने चाहियें पर हमारे देश की मीडिया के लिए इस तरह के दुखद हादसे पर भी गलत सेकुलरिज्म से प्रेरित रिपोर्टिंग की रोटियां सेंकना जैसे हमेशा की तरह अनिवार्य हो गया है।
जबकि हमारे देश की मिडिया ने रमेश को उन मुस्लिम लड़कियों का दोस्त ही बता दिया ताकि इस बात को छुपा सकें कि कैसे एक हिन्दू व्यक्ति ने अपनी जान की परवाह किये बिना मुस्लिम लड़कियों को बचाने के लिए पानी में तुरंत और बिना सोचे समझे छलांग लगा दी।
जो भी घटित हुआ बेहद दुखद है और ऐसे हादसे नही होने चाहियें पर हमारे देश की मीडिया के लिए इस तरह के दुखद हादसे पर भी गलत सेकुलरिज्म से प्रेरित रिपोर्टिंग की रोटियां सेंकना जैसे हमेशा की तरह अनिवार्य हो गया है।
जबकि हमारे देश की मिडिया ने रमेश को उन मुस्लिम लड़कियों का दोस्त ही बता दिया ताकि इस बात को छुपा सकें कि कैसे एक हिन्दू व्यक्ति ने अपनी जान की परवाह किये बिना मुस्लिम लड़कियों को बचाने के लिए पानी में तुरंत और बिना सोचे समझे छलांग लगा दी।
(Saket Dinekar)
