3 नवंबर 1947 ..! ......... अपना बांया हाथ टूट जाने की वजह से "मेजर सोमनाथ शर्मा" इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती थे। जब उन्हें पता चला कि पाकिस्तान सेना की मदद से कबाईली घुसपैठिए कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करते हुए श्रीनगर के नजदीक पहुंच गए है, वो हॉस्पिटल से भाग कर एयरपोर्ट आ गए और अपनी डेल्टा कंपनी में शामिल हो गए। उधर कबाइलियों की हजारों की संख्या कत्ले-आम करती हुई बरामुला तक पहुंच गई थी।जब उन्हें पता चला कि भारतीय सेना श्रीनगर हवाई-अड्डे पर लैंड करने वाली है, तो उन्होंने तेजी से श्रीनगर की ओर रुख किया।
"मेजर सोमनाथ शर्मा" एक हाथ से बंदूक थामे, दुश्मन की सेना पर फायरिंग कर रहे थे..!! उन्हें श्रीनगर हवाई-अड्डे की रखवाली का आदेश मिला था। उन्होंने अपने 55 साथियों के साथ 500 पाकिस्तानियों को 6 घंटे तक रोके रखा। जब तक कि सेना की अतिरिक्त मदद पहुंच नहीं गई।
मेजर सोमनाथ के साथ 4 कुमाऊं की डेल्टा-कंपनी बलिदान हो गई। मेजर शर्मा को मरणोपरांत देश का पहला "परमवीर चक्र" प्रदान किया गया..!
