कहा जाता है इंसान अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता है। उससे जितना बन पड़े वो हर मुमकिन कोशिश करता है। लेकिन कभी कभार ज़िंदगी जीने की ललक में लोग इस कदर गुज़र जाते हैं कि उन्हें सही और ग़लत की पहचान ही नहीं रहती। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में होकसे नाम का एक ऐसा गांव हैं जहां आधी से भी ज़्यादा आबादी पिछले कई दशकों से सिर्फ़ एक ही किडनी के सहारे जी रही है।
यह गांव बहुत ही ग़रीब है और लोगों का भरण-पोषण भी बमुश्किल हो पाता है। लेकिन लोगों ने अपने स्वास्थ को ताक पर रख कर किडनी बेचने का धंधा शुरू कर दिया। इस वजह से लोग इस गांव को 'किडनी गांव' के नाम से जानते हैं। किडनी बेचने का काम लोग किसी बीमारी के कारण नहीं बल्कि गरीबी के कारण कर रहे हैं।
गांव में रहने वाली गीता का कहना है कि उन्होंने लगभग दस साल पहले एक व्यक्ति के कहने पर किडनी निकलवाई थी, जिसके बदले उन्हें लगभग सवा लाख रुपए मिले थे। ज़िंदगी को बेहतर बनाने की जद्दोजहद ने आज गांव को इस हालत में लाकर खड़ा किया है।
इस गांव में अधिकतर युवक अपनी किडनी को 18- 20 साल की उम्र में ही बेच देते हैं। अब तो जैसे ये गांव का रिवाज़ बनता जा रहा है। गांव में जब भी किसी को पैसे की ज़रूरत होती है तो परिवार के किसी सदस्य की किडनी बेच दी जाती है। चौंकाने वाली बात ये है कि यहां के लोगों के लिए ये सामान्य सी बात है। यहां के निवासी केनाम तमांग बताते हैं कि छोटे से ऑपरेशन से ये प्रक्रिया पूरी हो जाती है। दो दिन बाद पता भी नहीं चलता कि शरीर के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ भी हुई है।
इस गांव में अधिकतर युवक अपनी किडनी को 18- 20 साल की उम्र में ही बेच देते हैं। अब तो जैसे ये गांव का रिवाज़ बनता जा रहा है। गांव में जब भी किसी को पैसे की ज़रूरत होती है तो परिवार के किसी सदस्य की किडनी बेच दी जाती है। चौंकाने वाली बात ये है कि यहां के लोगों के लिए ये सामान्य सी बात है। यहां के निवासी केनाम तमांग बताते हैं कि छोटे से ऑपरेशन से ये प्रक्रिया पूरी हो जाती है। दो दिन बाद पता भी नहीं चलता कि शरीर के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ भी हुई है।
