81 की उम्र, 23 साल से पैदल चल रहे हैं, अब तक की है 5,70,000 किलोमीटर यात्रा

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     आम तौर पर बुढ़ापे में लोग अपने घर में रहकर आराम करने की सोचते हैं, लेकिन एक ऐसा शख्स भी है, जो अपनी पकी हुई उम्र में लगातार एक मिशन पर लगा हुआ है।
     हम बात कर रहे हैं, बागीचा सिंह की। 81 वर्ष की उम्र के बागीचा सिंह पिछले 23 सालों से लगातार चल रहे हैं और उन्होंने अब तक 5,70,000 किलोमीटर यात्रा की है।
आखिर उनका लक्ष्य क्या है। वह अपनी यात्रा के जरिए तम्बाकू, अल्कोहल, बाल मजदूरी, भ्रष्टाचार और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक अभियान चला कर लोगों को संगठित कर रहे हैं। अब तक 21 बार भारत को लांघ चुके बागीचा सिंह की योजना तब तक रुकने की नहीं है, जब तक कि वह आखिरी सांस न ले लें।
      पैदल यात्रा के दौरान बागीचा सिंह की पीठ पर होता है 90 किलो वजनी बस्ता। इसके अलावा वह अपने हाथों में 2 तिरंगा थामे होते हैं, जिसके पोल की लम्बाई है करीब फुट। अपने 23 सालों की यात्रा के दौरान बागीचा सिंह कई राजनीतिज्ञों और सेलिब्रिटीज से मिल चुके हैं।
      पानीपत के रहने वाले बागीचा सिंह ने अपनी कभी न रुकने वाली इस यात्रा की शुरूआत जम्मू से 22 फरवरी 1993 को की थी। 12वीं की पढ़ाई करने के बाद युवा बागीचा ने अपने माता-पिता से कहा था कि वह शादी नहीं करना चाहते और अपना जीवन देश को समर्पित कर देना चाहते हैं।
     वह प्रतिदिन सुबह 5 बजे अपनी अभिनव यात्रा शुरू करते हैं और वह दिन के 12 बजे तक चलते हैं। 1 घंटा आराम करने के बाद वह फिर पैदल निकल पड़ते हैं और शाम 7 बजे तक लगातार चलते हैं।
     बागीचा सिंह की यात्रा की खासियत यह है कि वह प्रत्येक बार एक नया रूट खोजते हैं। उन्हें प्रेरणा मिलती है चन्द्रशेखर आजाद, सुभाष चन्द्र बोस और भगत सिंह से।
      
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