परिवार और परिचय
आदित्य कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर फर्रूखाबाद में हुआ है. तमाम आर्थिक तकलीफों के बावजूद भी उन्होंने कानपुर से बायोलॉजी में बीएससी किया और आस-पास के गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने लगे. इस बात से उनके परिवारीजन काफ़ी नाराज़ हुए. बाद में आदित्य ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए घर छोड़ दिया और फर्रूखाबाद से लखनऊ आ गए.
अब तक 4500 से अधिक बच्चों को शिक्षा दे चुके हैं
14 माह से आदित्य शिक्षा की रौशनी को देश भर में फैलाने की मुहिम में जुटे हुए हैं.
लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में नाम दर्ज़ है
मिले हैं कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी
पढ़ाना चाहते हैं और हज़ारों बच्चों को
आदित्य कहते हैं कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में निर्धन और पिछड़े बच्चों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान देना शुरू कर दिया है, लेकिन हमारा देश इतना बड़ा है कि यह भी पूरा नहीं पड़ रहा, इसीलिए आदित्य दूर दराज़ के इलाकों और मुख्यतः गाँवों में निर्धन बच्चों को पढ़ाने पर ज़ोर देते हैं.
हमें गर्व है कि आदित्य जैसे लोग निर्धन बच्चों को पढ़ा रहे हैं और देश की प्रगति में हिस्सेदार बन रहे हैं. हमारा सौभाग्य है कि इस देश में आदित्य कुअर जैसे लोग अभी भी मौजूद हैं.
