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कुटीर उद्योग की तरह पनप रहा जहरीली शराब का धंधा

   जहरीली शराब का हब बने आजमगढ़ में पहले भी सैकड़ों मौत हो चुकी है. इसके बावजूद इसका कारोबार कुटीर उद्योग की तरह यहां गांव-गांव में चल रहा है.
     इतना ही नहीं मोटी रकम की वसूली की एवज में पुलिस और आबकारी महकमे के अधिकारी भी इस कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं. यह जहरीला कारोबार न सिर्फ लोगों की जिन्दगी लील रहा है बल्कि आजमगढ़ में एक बार फिर किसी बड़े हादसे की तैयारी कर रहा है.
      बता दें वर्ष 2013 में जहरीली शराब पीने से एक साथ 47 मौतों के अलावा सैकड़ों लोगों को समय-समय पर मौत की नींद सुला चुका यह कारोबार रूकने के बजाय तेजी से फल-फूल रहा है. शराब माफियाओं, पुलिस और आबकारी विभाग के मजबूत गठजोड़ से हर महिने करोड़ों का वारा-न्यारा करने वाला कच्ची शराब का कारोबार आजमगढ़ के गांवो के घर-घर में बनाया और बेचा जाता है. एक रोजगार की शक्ल ले चुका यह अवैध कारोबार सरकार को करोड़ों के राजस्व की क्षति कर रहा है तो गंभीर मौत के हादसों को दावत भी दे रहा है.
    इतना ही नहीं इसके सेवन से लोगों की किडनी, लिवर और आंखो की रोशनी जाने का खतरा भी बना हुआ है. जब शराब माफियाओं के अड्डे पर छापा मारा गया तो चैकाने वाला खुलासा हुआ. इस धंन्धे में पुरूष ही नही महिलाएं भी मजबूती से शामिल है. इस जहरीली शराब की खपत इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह शराब सस्ती होती है और आसानी से गांव-गांव में उपलब्ध है.
    वहीँ, जहरीली शराब पीकर पैसे और सेहत से परेशान परिवारीजन पुलिस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते है. उनका आरोप है कि पुलिस शराब माफियाओं से मोटी रकम के एवज में कोई प्रभावी कार्यवाई नही करती