सिवान से हैदराबाद रवाना होने के लिए पटना पहुंचे दानिश ने एक विशेष भेंट में आईएएनएस को बताया, “मैं शुरुआत से ही हनुमान का भक्त रहा हूं। हनुमान और भगवान श्री राम के आर्शीवाद के कारण ही मुझे यह किरदार मिला। मैं ‘नॉनवेज’ भी नहीं खाता। जीवन में हनुमान की भूमिका निभाना मेरे लिए विशेष है।”
दानिश ने कहा उनका चुनाव ‘वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट’ में हुआ था, लेकिन वीजा की दिक्कतों के कारण शामिल नहीं हो पाए। उनका कहना है कि अब अगर उन्हें मौका मिलेगा तो वे रेसलिंग के रिंग में अपना दम जरूर दिखाएंगे।
दानिश मुस्लिम परिवार से आने के बाद हनुमान की भूमिका से संबधित एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “मुझे हनुमान की भूमिका करने में कोई दिक्कत नहीं है। धर्म से पहले सभी लोग इंसान हैं। जिस धर्म में मानवता और इंसानियत नहीं हो वह धर्म हो ही नहीं सकता। नफरत की बात कोई भी धर्म नहीं सिखाता।”
उन्होंने कहा कि धारावाहिक में चयन होने के बाद तीन महीने तक टीम के लोगों ने उनकी लुक्स पर काम किया और फिर हनुमान की बारीकियों को सीखा। आज 24 घंटे में से 22 घंटे तक शूटिंग कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि बिहार में इंजीनियर और डॉक्टर बनने वाले छात्रों का परिवार और समाज भी समर्थन करता है लेकिन रेसलर और अभिनय के क्षेत्र में जाने या कुछ अलग करने के लिए सहयोग नहीं मिलता।
उन्होंने कहा, “शुरुआत से ही मुझे कुछ अलग करने की तमन्ना थी और आज श्री राम ने उनकी सुन ली।”रेसलर दानिश अख्तर सुबह सात बजे सोकर उठते हैं। उनकी दिन की शुरुआत फ्रूट सलाद से होती है। वे प्रतिदिन पांच लीटर दूध, करीब 500 ग्राम घी, 500 ग्राम ड्राई फ्रूट्स खाते हैं। दोपहर के खाने में दानिश को दाल चावल, पनीर और ग्रीन सलाद पसंद है। हालांकि, हनुमान की भूमिका को लेकर इन दिनों वे अपना वजन कम करने में लगे हैं।
उन्होंने कहा कि वह अपने वजन को 10 किलोग्राम कम करना चाह रहे हैं। सिवान के रहने वाले दानिश का बचपन नवाबों के शहर लखनऊ में बीता है। उन्होंने लखनऊ में आठवीं तक की पढ़ाई की है। इसके बाद 12 वीं तक की पढ़ाई सिवान से की है।
