स्वयंसिद्ध देवी
जबलपुर शहर के सदर क्षेत्र में स्थित इस काली मंदिर में लगभग 550 साल पुरानी माता काली की भव्य प्रतिमा गोंडवाना साम्राज्य के दौरान स्थापित की गई थी। बताया जाता है कि स्वयंसिद्ध देवी की प्रतिमा को जरा सी भी गर्मी सहन नहीं होती और मूर्ति से पसीना निकलने लगता है। एसी बंद होते ही प्रतिमा से निकलती हुई पसीने की बूंदें स्पष्ट देखी जा सकती हैं। पसीना निकलने के कारणों पर अनेक बार खोज भी की गई है, लेकिन विज्ञान की दृष्टि में भी ये किसी चमत्कार से कम नही है।
हुआ कुछ ऐसा
मंदिर ट्रस्ट के पंडित के मुताबिक रानी दुर्गावती के शासनकाल में मदनमहल पहाड़ी में निर्मित मंदिर में स्थापित करने के लिए शारदा देवी की प्रतिमा के साथ इस प्रतिमा को मंडला से जबलपुर लाया जा रहा था। वर्तमान मंदिर के समीप इन मूर्तियों का काफिला पहुंचते ही काली मां की यह प्रतिमा लेकर चल रही बैलगाड़ी आगे नहीं बढ़ी। उसी रात को काफिले में शामिल एक बच्ची को स्वप्न देकर देवी ने कहा कि उन्हें यहीं स्थापित कर दिया जाए। इस पर प्रतिमा को चारों ओर तालाबों के बीच एक छोटी सी जगह (वर्तमान सदर) में ही स्थापित कर दिया गया। बाद में यहां मंदिर बनाया गया।
