इसकी एक बानगी देखने को मिली चित्रकूट धाम बांदा मंडल के भूगर्भ जल विभाग के ऑफिस में, जहां अधिसाशी अभियंता अनिल मिश्रा ऑफिस को मयखाना बना आराम से अपने केबिन में जाम छलका रहे थे।
जब उनसे पूछा गया तो नशे में टल्ली साहब का कहना था कि काम ज्यादा था इस वजह से ऑफिस में बैठकर रिलैक्स कर रहे हैं. पूछे जाने पर कि क्या ऑफिस थकान मिटने की जगह तो वे नशे के हालत में बिल बनवाकर उसे टल्ली हालत में वेरीफाई कर सरकार को भेजने की बात करते दिखे.
अब सवाल यह उठता है कि ऐसे अधिकारी जो मंडल स्तर के हैं. इस तरह से अपने काम को अंजाम देंगे तो जनता कहां जायेगी और भूख और प्यास से जूझ रही बुंदेलखंड की जनता को किस तरह से राहत मिलेगी.
