हनीमून मनाने ब्राजील से आए थे भारत, बन कर रह गए संत

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       राजस्थान के गंगानगर में सोमवार की शाम बाकि शामों से कुछ अलग ही थी। यह भी कह सकते हैं कि जरा हटके थी। यहां भक्ति के साथ प्रेम की अद्भुत अनुभूति का अहसास हो रहा था। दरअसल ब्राजील से आए आध्यात्मिक गुरु प्रेम बाबा यहां लोगों को मानव मात्र से प्रेम करने एवं विश्व बंधुत्व का संदेश दे रहे थे। प्रेम बाबा के साथ उनकी भजन मंडली भी आई जिसने लोगों के झूमने पर मजबूर कर दिया।
      प्रेम बाबा शुरू से ही संत नहीं थे, उन्होंने योगा, मार्शल आर्ट और मेडीटेशन की ट्रेनिंग ली है। एक दिन मेडीटेशन के दौरान उन्होंने हिमालय में एक सफेद दाढ़ी बाले व्यक्ति को देखा जिसने उन्हें 33 साल का होने पर ऋषिकेश बुलाया। 33 साल की उम्र में शादी होने के बाद प्रेम बाबा हनीमून मनाने इंडिया पहुंचे, वहीं वे बाबा हंस राज महाराज से मिले।
     प्रेम बाबा ने हंस राज महाराज को अपना गुरु बना लिया और संत बन गए। शादी के कुछ साल बाद पत्नी से तलाक ले लिया और अपनी जिंदगी दूसरों के नाम कर दी। इनकी एक बेटी भी है। प्रेम बाबा के आश्रम अमेरका, सेन फ्रांसिस्को, यूरोप, इजराइल, अर्जेंटीना, ब्राजील और भारत में भी हैं। प्रेम बाबा ने सोमवार को पुर्तगाली भाषा में प्रवचन दिए। संस्था की एक सदस्य प्रवचनों का हिंदी में अनुवाद कर रही थी।

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