रईस के अनुसार उन्हें चीन में ही लॉन्च करने को कहा गया था लेकिन उन्होंने चीन के इस ऑफर को नकार दिया। साथ ही उन्होंने भारत में ही इसे बनाने और बाजार में उतारने की बात रखी है। अगर चीनी कंपनी उनके साथ मिलकर इसे बनाने पर राजी हो गई तो जल्द ही सड़कों पर आप पेट्रोल के बजाय पानी से चलने वाली कार में सफर कर सकेंगे।
रईस के अनुसार उनके इस तकनिक में एसिटिलीन गैस का प्रयोग होता है। इस गैस का इस्तेमाल इंडस्ट्रीज में वेलडिंग और पोर्टेबल लाइटिंग के लिए किया जाता है लेकिन रईस इसका प्रयोग कार इंजन को चलाने में करते हैं। रईस पिछले 15 सालों से मैकेनिक का काम कर रहे हैं।
रईस बताते हैं कि वे कभी स्कूल नहीं गए और न ही कभी घर पर पढ़ाई-लिखाई की। यही कारण है कि उनके द्वारा किया गया यह इनवेंशन ने उन्हें देश का लोकल हीरो बना दिया है।
क्या है तकनिक
रईस एक गाड़ी को ठीक कर रहे थे तभी उनके दिमाग में एक आइडिया आया। उन्होंने कार के इंजन में बदलाव किया और गाड़ी के फ्यूल टैंक में पेट्रोल के बजाय पानी और कैल्शियम कार्बाइड की पाइप लगा दी। इसके बाद गाड़ी को स्टार्ट करके देखा तो इंजन ऑन हो गया। यह इतना आसान नहीं था इसे पूरी तरह कामयाब बनाने में पांच साल का समय लगा। अब उसकी कार 20 लीटर पानी और 2 किलो कैल्शियम कार्बाइड के मिश्रण से तैयार ईंधन से 20 किलोमीटर चलती है। इस तकनीक के द्वारा पानी और कैल्शियम कार्बाइड को मिलाकर एसिटिलीन पैदा किया जाता है और रईस द्वारा तैयार एसिटिलीन से चलने वाले इंजन में इसे डाला जाता है। इसमें एसिटिलीन बनते ही कार चलने लगती है।
