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दो पेड़ काटने की सजा, 500 पेड़ लगाने होंगे

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    हांसी।। पेटवाड़ डिस्ट्रीब्यूटरी के किनारे ढाणा कलां में आंधी के कारण गिरे दो पेड़ों को काटकर बेचने के आरोप में एक व्यक्ति को कुरुक्षेत्र की विशेष पर्यावरण अदालत ने 500 पेड़ लगाने की सजा सुनाई है। आरोपी को यह काम तीन महीने के अंदर पूरा करना होगा। अन्यथा उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।
     जानकारी के मुताबिक हांसी रेंज के अंतर्गत आने वाले गांव ढाणा कलां निवासी सुरेंद्र ने जनवरी 2014 में पेटवाड़ डिस्ट्रीब्यूटरी के किनारे आंधी के कारण गिरे कीकर और शीशम के दो सरकारी पेड़ों को अपनी मर्जी से काटकर बेच दिया था। दरअसल, जिस जगह पर वे पेड़ गिरे हुए थे, उसके नजदीक आरोपी सुरेंद्र का खेत है। इसलिए उसने पेड़ों को अपना बताकर बेच दिया था। जिसके बाद वन विभाग ने उसके पास इसका हर्जाना भरने के संबंध में दो बार नोटिस भेजे थे। लेकिन आरोपी ने नोटिस को हल्के में लेते हुए उसका कोई जवाब नहीं दिया।
      इसके बाद हांसी रेंज ऑफिसर रमेश यादव ने उसके खिलाफ केस बनाकर विशेष पर्यावरण कोर्ट कुरुक्षेत्र में अपील कर दी थी। उसी मामले में पर्यावरण अदालत ने आरोपित सुरेंद को तीन महीने की मोहलत देते हुए दस हजार के मुचलके पर छोड़ा है और आदेश दिया है कि उसे गांव में पीपल, नीम और वट के 500 पेड़ लगाने होंगे। उनकी पूरी देखभाल भी करनी होगी।
सरपंच और रेंजर करेंगे निगरानी
    अदालत ने दिए फैसले में ये भी आदेश दिए हैं कि सुरेंद्र द्वारा जितने भी पेड़ लगाए जाएंगे, वह सभी दो-तीन फुट से लंबे होने चाहिए। इस दौरान ग्राम सरपंच, नंबरदार और वन विभाग के रेंज ऑफिसर की अपनी नजर बनाए रखेंगे।
    हांसी रेंज अंतर्गत आने वाले गढ़ी, लोहारी, चैनत, भाटला, मोठ, बास, उमरा, सुल्तानपुर और सुलचानी समेत दर्जनों गांवों के 450 लोगों से अधिक ऐसे आरोपी हैं, जिनके ऊपर सरकारी पेड़ों को काटने या फिर पशुओं को द्वारा चराए जाने के नोटिस दिए जा चुके हैं। इनमें से 60 प्रतिशत लोगों ने जुर्माना राशि भर दी है, लेकिन अभी भी ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्होंने नोटिसों के जवाब भी नहीं दिए।
    कुरुक्षेत्र की विशेष पर्यावरण कोर्ट द्वारा सुनाए गए आदेश की कॉपी हमारे पास आई है। जिसका सख्ती के सात पालन किया जाएगा। इस तरह के फैसले से अनैतिक तरीके से पेड़ों को नष्ट करने वालों को कड़ा सबक मिलेगा।