आग से ज्यादा नुकसान दायक होती है लपटें और गैस
प्रो. दहिया ने बताया कि आग लगने पर आग टूटती है अौर अलग अलग तत्वों में विभाजित हो जाती है। इस दौरान इसमें से लीवोग्लूकोजन, टार गैस निकलती है। इस स्थिति में आग में फंसा व्यक्ति अन कॉन्सियश हो जाता है और निर्णय लेने की क्षमता खो देता है और आग में बेहोश होकर गिर जाता है। वहीं लपटें भी इसी तरह से हानिकारक है। शोध में इन्हीं स्थितियों पर काबू पाने का काम किया जा रहा है। अभी शोध का नहीं हुआ है, लेकिन कुछ परीक्षण होने के बाद यह काम किया जा सकेगा। डेवलेपमेंट ऑफ फ्लेम रिटार्टिड कॉटन फाइबर शोध के माध्यम से आग जैसी आपदा के खतरे को कम किया जा सकेगा, यह बड़ी बात है। जीजेयू में शोध विधि द्वारा तैयार किया गया कपड़ा जिस पर आग लगाई गई लेकिन आग फैली नहीं।
उत्पाद बनाते समय केमिकल ऐसा प्रयोग किया जाता है ताकि वह उत्पाद आग जल्दी से पकड़े, कोटिंग करने से किसी भी वस्तु की बाहरी परत को कोटिंग से ढंक दिया जाता है और आग अंदर तक नहीं पहुंचती, वहीं पॉली मरीन फिल्म एेसी विधि है जिसमें आग रोधक फिल्म से उत्पादों को लेमिनेटेड कर दिया जाता है। ट्रेन, बस, हवाई जहाज में लगे उत्पादों में आग कम गति से फैलेगी, जिन जगहों पर पहुंचना मुश्किल होता है वहां यह विधि बहुत फायदेमंद साबित होगी। प्रो. दहिया ने बताया कि लैब में पॉलीपरोपलीन, नाइलोन और कॉटन पर परीक्षण किया जाता है और इनसे बनने वाली हर चीज को ऐसी विधि से तैयार किया जा रहा है जिससे आग कम फैले।
प्रो. दहिया ने बताया कि घर या अन्य जगहों पर प्रयाेग किए जाने वाला फर्नीचर या टैक्सटाइल ज्यादातर आग फैलने के अनुकूल होता है। इन चीजों को बनाए जाने के वक्त अगर रसायन विभाग द्वारा सुझाई गई विधि केमिकली, कोटिंग और पाॅलमरीन फिल्म विधि का प्रयोग किया जाए तो आग की लपटों पर काबू पाना आसान हो सकता है। मगर जरूरी यह है कि चीजों के निर्माण करते समय उनकी बेसिक प्रॉपर्टी नहीं बदलनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर एक शीशे को मजबूत तो बना लें अगर उसकी पारदर्शिता ही रहे तो उसकी प्रोपर्टी बदल जाती है। इन विधि का प्रयोग करके उत्पाद बनाए जाएं तो आग लगने पर पर्दा, कारपेट, फर्नीचर जलेगा लेकिन लपटें नहीं निकलेंगी, पास में रखी चीजों तक आग नहीं पहुंचेगी।
