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कहने को चौथा स्तम्भ हूँ पर खुद बे आधार हूँ..

     अभी सीवान और गया में पत्रकार की हत्‍या का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि पटना में पत्रकार पर जानलेवा हमला हो गया। अपराधियों ने पत्रकार राकेश सिंह को पहले उनकी गाड़ी से अपनी गाड़ी में बिठाया और जमकर मारपीट की। उनका एटीएम छीनकर पैसे भी निकाल लिये। गाड़ी में आयी खराबी के कारण अपराधी गाड़ी छोड़ कर फरार हो गए। वह लहूलुहान गाड़ी में पड़े रहे।
      आखिर क्‍या हो गया नीतीश जी। बिहार में कहां है कानून-व्‍यवस्‍था। आम आदमी की सुरक्षा का दावा खोखला साबित हो रहा है। बिहार में वर्तमान सरकार के रहते कानून व्‍यवस्‍था बहाल करना संभव भी नहीं रह गया है। आज फिर से बिहार रो रहा है। अपने दुःखों में एक बार फिर से बिहार में अपराधियों की बहार आ गया है। आज स्थिति यह कि सरकार और समाज के कहने वाले चौथे स्तंभ ही पुरे बिहार में सुरक्षित नहीं है। मान्यवर छोटे भाई और बडे भाई ने आंखें अपराध के नाम पर बंद कर लिया है ।नीतीश बाबू कहते हैं । बिहार में मंगल राज है।
     कहा है मंगल राज आज फिर से 1990 की ओर इशारा करता जो लालू यादव के नेतृत्व में अपराधियों की बोल बाला था। सहिष्णुता के नाम की बिहार में नहीं रहा। क्या वेदना करूंगा।
आजकल सभी पत्रकार वार्ता कहते हैं।
"मै पत्रकार हूँ"
राजनीती का शिकार
हूँ,लाचार हूँ..
किसी के पक्ष में न लिखूँ तो
बेकार हूँ..
किसी के पक्ष में लिखूँ तो
चाटुकार हूँ..
हर किसी को खुश करना मुझे
नही आता..
क्या करूँ समाज और सरकार के
बीच की तकरार हूँ..
कहने को चौथा स्तम्भ हूँ पर
खुद बे आधार हूँ..
सचमुच में लाचार हूँ..
फिर भी गर्व है मुझे क्योंकि
में पत्रकार हूँ..
"हाँ में पत्रकार हूँ"
पत्रकार हूं।
लोगों का कहना है कि मैं पत्रकार हूँ।
लेकिन बिहार में लगातार लाचार है।
राज्य सरकार के खिलाफ नहीं कर सकता
क्योंकि मैं लाचार है। अपराधी की गोली से।