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सियासी दलित भोज के अखाड़े में शाह

    बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह आज वाराणसी के जोगियापुर में दलितों के साथ भोजन करने पहुंचे। 2017 में होने वाले यूपी चुनावों के मद्देनजर उनका यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दलित और पिछड़ों के वोट बैंक पर नजर
     2017 विधानसभा चुनाव से पहले दलितों और अति पिछड़ों को अपने पाले में करने के लिए भाजपा के तरफ से यूनीक फॉर्मुला निकाला गया है या फिर यूं कहे कि कांग्रेस की राह पर चलते हुए बीजेपी यूपी में सभी दलों के वोट बैंक पर सेंध लगाने के तैयारी में है। बीजेपी दलितों का खुद को हितैषी बताने के लिए अब दलितों के घर जाकर उनकी रसोई में बने खाने का स्वाद चख रही है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी भी बनारस के सिर गोवर्धन में सन्त रविदास मंदिर में रैदासियों के संग लंगर चख कर दलितों को अपना बनाने का प्रयास कर चुके हैं। आज वाराणसी के सेवापुरी विधानसभा के जोगियापुर गांव में अमित शाह ने बिंद समुदाय के लोगों के साथ भोज किया जिससे समुदाय के लोग बेहद खुश दिखाई दिए।
भाजपा के कदम पर विरोधियों की नजर
     भाजपा के इस कदम पर विरोधियों की न सिर्फ नज़र है बल्कि उनका कहना है कि बीजेपी हमेशा से राहुल गांधी के दलितों के साथ भोजन करने को लेकर सवाल उठाती रही और अब बीजेपी खुद उसी राह पर चल रही है हालांकि ऐसी प्रतिक्रिया पर बीजेपी ने स्पष्ठ करते हुए कहा की सभी सियासी दलों ने सिर्फ दलितों की राजनीति कर रही है मगर उनका विकास नहीं किया और बीजेपी सबका साथ सबका विकास की मानसिकता रखने वाली पार्टी है इसलिए हमने हर वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलने के लिए ये कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
खाना खाने का नाटक कर रहे हैं : मायावती
    मायावती ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह खाना खाने का नाटक कर रहे हैं।
अखिलेश का अमित शाह पर तंज 
    इससे पूर्व अखिलेश यादव ने अमित शाह के दलितों के साथ भोजन करने पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि संदेश देने के लिए खुद उन्होंने भी मजदूरों के साथ खाना खाया था, लेकिन उनकी जाति नहीं पूछी थी।
जाति और वर्ग के आधार पर जनता के बीच न जाएं 
    अखिलेश ने राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में एक सवाल पर कहा कि चुनावी मौसम में संदेश देने के लिये कई तरह के काम किये जाते हैं लेकिन पार्टियों को काम के आधार पर जनता के बीच जाना चाहिये, जाति या वर्ग के आधार पर नहीं।
      उन्होंने कहा, प्रदेश में चुनाव आ रहा है। चुनाव में संदेश देना है तो स्नान भी करेंगे। संदेश देना है तो मजदूर भाइयों के साथ भी खाना खाना है। हमने भी मजदूरों के साथ खाना खाया है, लेकिन बगल में बैठी औरत की जाति नहीं पूछी थी। हम जाति वर्ग के आधार पर चीजों को नहीं देखते। जनता में काम के आधार पर जाना चाहिये, उपलब्धियों के आधार पर जाना चाहिये। यह हमारा लोकतंत्र है, संविधान है।
अमित शाह ने दलित के घर खाना तो खाया लेकिन पानी नहीं पीया
Anurag Lakshya's photo.     अमित शाह ने मंगलवार को सेवापुरी विधानसभा के जोगियापुर गांव में दलित परिवार के साथ बैठकर खाना खाया। हालांकि अमित शाह ने दलित के घर खाना तो खाया लेकिन पानी नहीं पीया। खाने के बाद उन्होंने सील बंद बोतल का मिनरल पानी ही पीया। 2017 के इलेक्शन के पहले बीजेपी प्रेसिडेंट का यह तरीका विरोधियों को पसंद नहीं आया।
Anurag Lakshya's photo.      बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के लिए ‘मुंह में राम, बगल में छुरी’ मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि यूपी में दलितों के साथ उनका भोजना करना राजनीतिक नाटक है. मायावती ने कहा कि एक तरफ बीजेपी शासित हरियाणा में दलितों के नेता कांशीराम की मूर्ति तोड़ दी जाती है तो दूसरी तरफ बीजेपी अध्यक्ष यूपी में दलितों के साथ खाने का राजनीतिक नाटक करते हैं.
      मायावती ने कहा कि अमित शाह का एक ओबीसी के घर पर चुने हुए दलितों के साथ भोजन करना ठीक वैसा ही है जैसा कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी बसपा की सरकार के कार्यकाल में करते थे. मायावती ने मांग की है कि हरियाणा में कांशीराम की मूर्ति फिर से लगवाई जाए और मूर्ति तोड़ने में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
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