सिलाई करने वाले का बेटा बना आईएएस

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    कहते हैं की मन में कुछ कर गुजरने की प्रबल इच्छा शक्ति हो तो मार्ग में आने वाली बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं। जी हां, बारां शहर के झालावाड़ रोड, तेल फैक्ट्री क्षेत्र निवासी भारतीय प्रशासनिक सेवा में 970वीं रैंक हासिल कर कुछ ऐसा ही कर दिखाया गुदड़ी के लाल विकास वर्मा ने।
     विकास वर्मा ने बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद दिल्ली में एक वर्ष की कोचिंग की है। विकास वर्मा का कहना है कि पिता राधेश्याम बैरवा तेल फैक्ट्री क्षेत्र में टेलरिंग की दुकान चलाते हैं। पढ़ाई के लिए पिता ने रात को 12 से दो बजे तक सिलाई की। यह देखकर शुरुआत से ही जीवन में सबसे आगे रहने का लक्ष्य तय किया था। आईएएस के एग्जाम को पास कर पिता की मेहनत को सफल बनाना था। पढ़ाई करते समय भी यह बात हमेशा जेहन में बनाए रखी। उन्होंने नियमित रूप से 6 घण्टे अध्यन कर सफलता हासिल की है।
विकास का कहना है कि अगर लक्ष्य बना कर मन में कुछ कर गुजरने के लिए मेहनत की जाए तो किसी भी कार्य में सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने सिलाई करके घर का खर्च चलाने वाले अपने गरीब पिता के सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपना स्थान बनाने में सफलता हासिल की है। पुत्र विकास वर्मा का भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन होने पर पिता राधेश्याम बैरवा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यही नहीं पूरा परिवार खबर सुनते ही खुशियों से भर गया। अपने बेटे की सफलता पर पिता ने कहा कि बेटे की मेहनत और पढ़ाई के प्रति लगन रंग लाई। इससे न केवल परिवार और शहर का नाम रोशन हुआ है बल्कि जिले का भी नाम रोशन हुआ है। राधेश्याम का कहना है कि मैंने अपने जीवन में कुछ भी नहीं कर पाया है लेकिन बच्चे को पढ़ाने के लिए हर कोशिश की है. सिलाई करके पैसे कमाए हैं और बच्चे को पढ़ाया है. मैं एक गरीब तबके से आता हूं, लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं खोई. जिसका आज मुझे अच्छा परिणाम मिला है।
    एक पिता ने अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए किस कदर मेहनत की है और आखिर उसकी मेहनत ने पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है। श्री विकास वर्मा को अनन्त शुभ कामना एवं कोटिश बधाई।




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