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रिफाइंड तेल से बढ़ जाता है हार्ट अटैक व कैंसर का खतरा

  खानपान में सरसों तेल व घी का इस्तेमाल घटता जा रहा है। आधुनिकता की दौड़ में इसकी जगह रिफाइंड तेल ने ली है। लेकिन यदि खानपान में रिफाइंड का इस्तेमाल अधिक करते हैं तो जरा संभल जाएं। क्योंकि कई शोधों के आधार पर डॉक्टरों ने दावा किया है कि इसकी तुलना में भारतीय पारंपरिक तेल (सरसों, घी, नारियल) सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद हैं। यह रिपोर्ट इंडियन हाई जरनल में प्रकाशित हुई है।
हार्ट अटैक का खतरा 70 फीसद कम 
     डॉक्टरों का दावा है कि सरसों तेल के इस्तेमाल से हार्ट अटैक होने का खतरा 70 फीसद कम हो जाता है, जबकि रिफाइंड तेल के इस्तेमाल से हार्ट अटैक के अलावा कैंसर होने का भी खतरा बढ़ जाता है। यह रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. एससी मनचंदा ने कहा कि हृदय की बीमारियां दुनिया भर में तेजी से बढ़ी हैं।
      भारत में भी यह पहले के मुकाबले पांच गुना तेजी से बढ़ी हैं। पहले घरों में जब लोग खाने में कच्ची घानी का सरसों तेल इस्तेमाल करते थे, तो हृदय की बीमारियां इतनी नहीं होती थी। फिर कहा जाने लगा कि इन तेलों में सैचुरेटेड फैटी एसिड (एसएफए) होता है इसलिए इनका इस्तेमाल सेहत के लिए ठीक नहीं है। इस वजह से रिफाइंड का इस्तेमाल बढ़ गया।
आठ अस्पतालों का शोध
     डॉ. मनचंदा के मुताबिक, पिछले एक दशक में ऐसे कई शोध हुए हैं, जिनसे यह साबित होता है कि सरसों का तेल रिफाइंड से ज्यादा बेहतर है। दिल्ली व बेंगलुरु के आठ अस्पतालों ने मिलकर भी शोध किया था। इसमें एम्स भी शामिल था।
     डॉ. मनचंदा ने कहा कि अब शोधों से यह साबित हो चुका है कि सैचुरेटेड फैटी एसिड से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता। रिफाइंड तेल तैयार करने के लिए उसे कई बार उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है। इसके चलते उसमें कई हानिकारक तत्व उत्पन्न हो जाते हैं।
     यही वजह है कि एक समय के बाद वह खराब हो जाता है, जबकि घी खराब नहीं होता। सरसों तेल में ओमेगा-3 ओलिव ऑयल से भी ज्यादा होता है। इसलिए सरसों हृदय की बीमारियों के लिए ओलिव ऑयल से भी ज्यादा अच्छा है।