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बीजेपी के ये मंत्री.. 15 हजार बेटियों की शादिया करवा चुके है

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    भोपाल। राजनीति अगर सेवा का माध्यम बन जाए तो जनता और नेता के बीच दिलों के रिश्ते बनने लगते हैं। देश में कई ऐसे राजनेता हैं जो जनता के सुख और दुख को अपना समझकर उनका हर पल साथ देते हैं। ऐसे ही नेताओं में एक हैं भाजपा के नेता जिन्हें उनके क्षेत्र की जनता पिता का दर्जा देती है।
   मध्यप्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने ऐसा उदाहरण पेश किया है कि उनके विधानसभा क्षेत्र की लडकियां उन्हें पिता का दर्जा देती है। बल्कि जो लड़कियां उन्हें पिता का दर्जा देती उनकी संतान उन्हें नाना के नाम से पुकारती हैं।
एक महिला की बातों ने बदल दी जिंदगी
      दरअसल, बुंदेलखंड जैसे गरीब इलाके का प्रतिनिधित्व करने वाले गोपाल भार्गव जब 2003 में पहली बार मंत्री बने तो एक महिला की गरीबी ने उनको झंकझोर दिया, गरीब महिला अपनी बेटी की शादी तो तय कर चुकी थी लेकिन उसके पास इतना पैसा भी नहीं था कि वो अपनी बेटी को नए शादी के जोड़े में सजाकर मंडप में बिठा सके।
     यह बात जब मंत्री गोपाल भार्गव को पता चली तो उनके मन में तकलीफ हुई उसका बाद से उन्होंने न सिर्फ सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित कर मध्यप्रदेश के लिए अनूठा उदाहरण पेश किया बल्कि उन लडकियों का कन्यादान कर एक पिता की भूमिका भी निभाना शुरू किया। उन्होंने कन्यादान की हुई लड़कियों की बेटियों की संतान के जन्म लेने पर नाना का फर्ज भी निभाया। 
15 हजार लड़कियों का करवा चुके हैं विवाह
     मंत्री गोपाल भार्गव अब तक 15 सामूहिक विवाह आयोजित कर करीब 15 हजार जोड़ो की शादी करवा चुके हैं और अब उनकी संतान के जन्म लेने पर वो सारी जिम्मेदारी भी निभाते हैं जो बुंदेलखंड की परम्पराओं में रची बसी है।
कैसे शुरू हुआ सामूहिक विवाह का सिलसिला
     बात 2003 की है जब प्रदेश में भाजपा की सरकार आते ही लगातार 1985 से चुनाव जीतते आ रहे मंत्री गोपाल भार्गव को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। विधायक रहते हुए जनसमस्याओं के निराकरण के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले मंत्री गोपाल भार्गव से उनके विधानसभा क्षेत्र रहली की जनता की उम्मीदों और ज्यादा बढ़ गई।
     ऐसे ही एक दिन गोपाल भार्गव अपने गृहनगर गढाकोटा में जनसमस्याएं सुन रहे तो एक गरीब महिला रोते-रोते मंत्री के पास पहुंची और उसने बताया कि उसने अपनी बेटी का रिश्ता तो तय कर दिया है, लेकिन बदकिस्मती के चलते आज उसके पास इतने पैसे भी नही हैं कि वो अपनी बेटी की शादी के लिए शादी के कपड़े खरीद सके। महिला ने मंत्री गोपाल भार्गव को बताया कि लड़की को शादी के मंडप में बिठाने के लिए जरूरी कपड़े खरीदने के लिए पैसे नहीं है, बाकी इंतजाम तो दूर की बात।
     हमेशा जनसेवा के लिए समर्पित मंत्री गोपाल भार्गव एक मां की पीड़ा सुनकर द्रवित हो गए। उन्होंने तत्काल महिला की आर्थिक मदद और तमाम जरूरतें पूरी की और ठान लिया कि अब उनके विधानसभा क्षेत्र में कोई भी बेटी ऐसी नहीं रहेगी कि गरीबी के चलते उसके हाथ पीले न हो पाएं।
    उन्होंने फैसला किया कि वो अपने विधानसभा क्षेत्र में हर साल सामूहिक विवाह का आयोजन अपने खर्चे और समाज की मदद से करेंगे और ऐसी कन्याओं के विवाह शान शौकत से कराएंगे, जिनकी शादी पैसों के अभाव में या तो हो नहीं पाती या फिर वैसी नहीं होती जैसा हर लड़की का सपना होता है। मंत्री की पहल पर समाज ने भी साथ दिया और 2004 से शुरू हुआ सामूहिक विवाह का सिलसिला आज तक जारी है।
जब अपने बेटे और बेटी की शादी भी सामूहिक विवाह समारोह में करवायी
     मंत्री की इस पहल की जमकर सराहना हुई, लेकिन आलोचना भी शुरू हो गयी। बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाकों में सामूहिक विवाह सम्मेलन को लेकर कई तरह की मान्यताएं है। गरीब तबके के लिए ये वरदान है तो संपन्न लोग सामूहिक विवाह की तारीफ तो करते हैं लेकिन अपने बेटे बेटियों की शादी सामूहिक समारोह में करवाने से कतराते हैं क्योकिं उन्हें डर होता है कि लोग कहेंगे कि पैसा बचाने के लिए ये काम किया।
     मंत्री गोपाल भार्गव के विरोधी और आलोचक उनकी सामूहिक विवाह समारोह की पहल का ये कहकर विरोध करने लगे कि गरीबों का विवाह कराकर वाहवाही लूटना तो आसान है बात तब है जब सामूहिक विवाह सम्मेलन में मंत्री गोपाल भार्गव अपने बेटे-बेटियों की शादी करवाए।
    मंत्री गोपाल भार्गव ने अपने बेटे और बेटी का सामूहिक विवाह सम्मेलन में उन सब गरीब जोड़ों के साथ एक ही मंडप में विवाह करवाकर आलोचकों को करारा जबाब दिया। हालांकि मंत्री गोपाल भार्गव के पिता पंडित शंकर भार्गव इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन जिद के पक्के गोपाल भार्गव उन्हें मनाने में सफल रहे और 2015 में गोपाल भार्गव ने ऐसी मिसाल कायम की कि उन्होंने अपने बेटे अभिषेक और अवंतिका की शादी भी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करवायी। उनकी इस पहल की सराहना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की और उनके बेटे अभिषेक को दिल्ली बुलाकर शुभकामनाएं दी।
नाना नाम से मशहूर हो रहे हैं मंत्री
       एक सार्थक सामाजिक पहल मंत्री गोपाल भार्गव को इस कदर लोकप्रिय बना देगी ये उन्होंने कभी नहीं सोचा था। गरीब कन्याओं की शादियां कराकर करीब 15 हजार कन्याओं के पिता का दर्जा हासिल कर चुके गोपाल भार्गव के नाना बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। दरअसल हजारों कन्याओं की शादियां कराकर चुके गोपाल भार्गव के साथ एक और दिलचस्प वाक्या घटा। 2005 के सामूहिक विवाह सम्मेलन में गोपाल भार्गव ने अपने विधानसभा क्षेत्र के दुधौनिया गांव की एक आदिवासी कन्या की शादी करवायी थी और उसका कन्यादान लिया था।
      शादी के बाद जब आदिवासी महिला ने बेटे को जन्म दिया तो बुंदेलखंड की परम्परा के अनुसार एक महिला मंत्री गोपाल भार्गव के घर गुड के लड्डू लेकर पहुंची और मंत्री गोपाल भार्गव को बताया कि दो साल पहले उनकी बेटी की शादी आपने ही सामूहिक विवाह सम्मेलन में करवायी थी और आपने ही कन्यादान लिया था, अब आप नाना बन गए हैं इसलिए लड्डू लेकर आयी हूं।
      इस वाक्ये ने एक बार फिर मंत्री गोपाल भार्गव को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराया और बुंदेलखंड की परम्परा के अनुसार गोपाल भार्गव उस आदिवासी महिला के घर पथ (जन्मोत्सव के समय दिए जाने वाले उपहार) लेकर पहुंचे और यही से उन्हें नाना के रूप में पुकारे जाने लगा।
     गोपाल भार्गव करीब 15 हजार कन्यादान कर चुके हैं और उनकी धर्मबेटियों के यहां जब भी संतान जन्म लेती है तो उनके पास लड्डू पहुंचते ही वो पिता का फर्ज निभाते हुए पथ लेकर पहुंचते हैं। अपने समाजसेवा के समर्पण के चलते मंत्री गोपाल भार्गव नई पीढ़ी के नाना के रूप में मशहूर हो रहे हैं।