
पीएम नरेन्द्र मोदी की चौथी अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग पर एक दशक पुरानी भागीदारी को नई ऊंचाई पर ले जाते हुए मंगलवार को अमेरिका ने भारत में छह परमाणु संयंत्रों के निर्माण करने का फैसला किया।
मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच हुई बैठक में अमेरिकी कंपनी वेस्टिंगहाउस और भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम (एनपीसीआईएल) परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए इंजीनियरिंग और साइट डिजाइन का काम शुरू करने पर सहमत हुए।
मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा कि परमाणु संयंत्रों की निर्माण का काम तुरंत शुरू होगा। भारत ने परमाणु दायित्व मुद्दे को संबोधित किया है और अब रिएक्टर की स्थापना की तैयारियां होनी है। दोनों देश इस अनुबंधात्मक व्यवस्था को जून 2017 तक पूरा करने की दिशा में काम करेंगे। परियोजना पूरा होने के बाद अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक होगी और इससे भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने तथा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्यों को पूरा करने में मदद करेगी।
एनएसजी और एमटीसीआर की सदस्यता के लिए अमेरिकी समर्थन
वियाना में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की प्रस्तावित बैठक से पहले इसकी सदस्यता हासिल करने में भारत की कोशिशों को अमेरिका के समर्थन से और बल मिला है।
यहां व्हाइट हाउस में हुई द्विपक्षीय शिखर बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ओवल हाउस में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के संबोधित करते हुए मोदी ने अमेरिका के भारत को एनएसजी तथा मिसाइल प्रौद्योगकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) में सदस्यता के लिये मदद एवं समर्थन के लिये अपने‘मित्र’ओबामा के प्रति आभार व्यक्त किया।
मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका परमाणु सुरक्षा, ग्लोबल वार्मिंग और आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओबामा से असैन्य परमाणु सहयोग पर हुई प्रगति और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
ओबामा ने कहा कि भारत-अमेरिका का सहयोग विकसित देशों के लिए भी मददगार होगा और दोनों देश भविष्य में भी साथ मिल कर काम करेंगे।
मोदी और ओबामा के बीच एनएसजी और एमटीसीआर का समझौता ऐसे समय में हुआ है जब एनएसजी की नौ जून को वियाना और फिर 24 जून को सोल में महत्वपूर्ण बैठक होनी है। एमटीसीआर में भारत के शामिल होने की घोषणा किसी भी समय होने की संभावना है।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग करने पर भी सहमत
जयशंकर ने कहा कि दोनों नेता सुरक्षा मुद्दे पर समन्वय बनने के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग करने पर भी सहमत हुए, जिसमें‘ रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल (डीटीटीआई)’के तहत मेक इन इंडिया कार्यक्रम में अमेरिकी कंपनियां भाग लेंगी।
उन्होंने कहा कि 26/11 के दोषियों को सजा दिलाने के समर्थन के अलावा, अमेरिका ने पठानकोट आतंकी हमले पर भारत की मांगों का पूरा समर्थन किया।
इसके साथ ही भारत एवं अमेरिका ने आर्थिक संबंधों एवं पेरिस जलवायु समझौते को जल्द से जल्द क्रियान्वित करके‘जलवायु न्याय’के लिये काम करने का भी संकल्प लिया।
आर्थिक, तकनीकी सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा और साइबर सुरक्षा पर भी हुई बात
मोदी ने अपने संबोधन में ओबामा को अपना‘परम मित्र’कह कर पुकारा और कहा कि उन दोनों के बीच कई विषयों पर बातचीत हुई, जिनका स्वरूप जितना राजनयिक था, उतना ही‘दोस्ताना’भी रहा। उन्होंने कहा कि भारत एवं अमेरिका के रिश्तों की चर्चा होना स्वाभाविक है। दोनों देशों ने वैश्विक दृष्टि कंधे से कंधे मिला कर परमाणु सुरक्षा, आतंकवाद, वैश्विक तापवृद्धि और पेरिस में जलवायु समझौते के मुद्दे पर अहम भूमिका निभायी है।
पीएम ने कहा कि आज की बैठक में आर्थिक संबंधों को ऊँचाई पर ले जाने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा के लिये वित्तीय आवंटन बढ़ाने, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट नेटवर्क में भारत की भागीदारी बराबर की करने पर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि भारत 35 वर्ष से कम आयु के 80 करोड़ युवाओं वाला देश है। भारत की युवा शक्ति एवं प्रतिभा अमेरिका के साथ मिल कर काम करे तो मानव कल्याण, नवान्वेषण के क्षेत्र में काफी प्रगति हो सकती है।
जी-20 की बैठक में फिर मिलेंगे मोदी और ओबामा
मोदी ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है। दोनों देश विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। हम दोनों जितना मिलकर काम करेंगे, विश्व कल्याण के लिये, विकासशील देशों की तरक्की के लिये काफी योगदान दे पायेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी और ओबामा की अगली मुलाकात जी-20 की बैठक के दौरान होगी। तब तक काफी प्रगति हो चुकी होगी। जलवायु न्याय के सपने को साकार करने में सफलता मिलेगी।
ओबामा ने की मोदी की तारीफ
इससे पहले ओबामा ने कहा कि उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, असैन्य परमाणु ऊर्जा पर सहयोग बढ़ाने के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि सबसे बड़ी प्राथमिकता है। गरीबी उन्मूलन पर काम करेंगे। अन्य क्षेत्रों में भी अवसर जुटाये जायेंगे।
उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण विषय क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी बात हुई है। इसके साथ दोनों देश साइबर सुरक्षा के मुद्दे पर भी मिल कर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि वह मोदी का बहुत अधिक आदर करते हैं। जब भी मोदी अमेरिका आते हैं तो न केवल प्रवासी भारतीयों बल्कि अमेरिका के लोगों में उनके आने से नये उत्साह एवं गौरव की अनुभूति होती है। यह दोनों नेताओं एवं भारत अमेरिका के रिश्तों की गहरायी का प्रतीक चिह्न है।
मोदी ने अपने वक्तव्य में अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के लिये आमंत्रित किये जाने के लिये भी आभार जताया।
