एम्स का दावा, पाउडर के रुप में होगी हेपेटाइटिस बी की नई वैक्सीन

Translate News:
    भारत के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान एम्स का दावा है कि हेपेटाइटिस बी संक्रमण को रोकने के लिए संस्थान ने ओरल वैक्सीन पर शोध किया है। हेपेटाइटिस बी संक्रमण को रोकने के लिए एम्स ने नई वैक्सीन पर काम किया है।
    दो चरणों के शोध में ड्राई वैक्सीन के परिणाम सफल देखे गए हैं। तीसरे और अंतिम चरण का परीक्षण मनाव शरीर पर किया जाएगा, जिसके लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने अनुमति ले ली गई है। आपको बता दें कि हेपेटाइटिस बी संक्रमण की वजह से बच्चों में पीलिया और डायरिया बीमारी होती है।
     विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बायोटेक्निोलॉजी विभाग द्वारा वित्त पोषित शोध की मदद से तैयार वैक्सीन को अगले पांच साल में भारत सरकार के नियमित टीकारण कार्यक्रम में शामिल कर दिया जाएगा। शोध को अंतराष्ट्रीय जर्नल वैक्सीन के जून महीने के अंक में प्रकाशित किया गया है।
     एम्स के पैथोलॉजी विभाग के डॉ. अमित कुमार डींडा ने बताया कि वैक्सीन को ओरल रूप में विकसित किया गया है जिससे आईपीवी (इंट्रा मॉस्कुलर वैक्सीन) या मांसपेशियों में इंजेक्शन के जरिए दिए जाने वाले वैक्सीन की अपेक्षाकृत नकारात्मक असर का खतरा कम रहता है। मानव पर सफल परीक्षण के बाद इसी तकनीक पर चिकित्सक टीबी और एचआईवी की वैक्सीन तैयार करने की योजना भी बना रहे हैं, जिससे आईपीवी से होने वाले संक्रमण के खतरों को कम किया जा सके। जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से लैबारेटरी में तैयार वैक्सीन में हेपेटाइटिस बी संक्रमण के एंटीजन और प्रोटोन को नैनो ऑयल के साथ समिश्रित किया गया। वैक्सीन के ड्राई फार्म के लिए 60 से 90 एमएम के सिंथेटिक पॉलीमर का सघन संशोधन किया गया। शोध के लिए बायोटेक्निोलॉजी विभाग 70 लाख रुपए अनुमोदित किए थे।
कैसे तैयार हुई वैक्सीन
     वैक्सीन के लिए एफडीए प्रमाणित पॉलीमर का इस्तेमाल किया गया। पॉलीई कैपरोलैक्टिोन को हेपेटाइटिस बी के एंटीजन (एचबीएसएजी) को 60 एमएम से भी छोटे नैनोपार्टिकल के साथ फैब्रिकेट किया गया, जिसके बाद तैयार वैक्सीन को दो चरण में पहले चूहों पर फिर गिनीपिग या सुअर पर प्रयोग किया गया। हेपेटाइटिस बी की पुरानी वैक्सीन सैनडैक और नैनो वैक्सीन की निर्धारित मात्रा चूहों और सुअर को दी गई। पुरानी वैक्सीन के बाद बूस्टर डोज की जरूरत महसूस की गई, जबकि पोलीमर या नैनो वैक्सीन की एक डोज ने ही चूहों की इम्यूनिटी को चार गुना बढ़ा दिया। वैक्सीन 2021 तक नियमित टीकाकरण कार्यक्रम मंे शामिल होगी।
क्या होगा फायदा
- नई वैक्सीन के लिए संरक्षित गृह या कोल्ड स्टोरेज की जरूरत नहीं होगी
- सामान्य कमरे के तापामन पर तैयार वैक्सीन को ड्राई रूप में तैयार किया गया है
- एक डोज ही काफी होगी संक्रमण रोकने के लिए, बुस्टर या अन्य तीन डोज नहीं देनी होगी
- ओरल रूप में होगी वैक्सीन, इससे संक्रमण का खतरा कम होगा
- नई वैक्सीन पर पुरानी वैक्सीन की अपेक्षाकृत कम होगा खर्च
Loading...

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top