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कश्मीर बनने की राह पर है कैराना, सैकड़ों हिन्दू परिवार घर छोड़कर भागे

      पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में स्थित कैराना शहर इन दिनों चर्चा में है। राजधानी दिल्ली से सिर्फ 124 किलोमीटर दूर इस शहर से सैकड़ों हिन्दू परिवार पलायन कर गए हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस शहर को कश्मीर बनाने की साजिश रची जा रही है।
      पिछले दो साल में इस शहर से रंगदारी, फिरौती और गुंडागर्दी की वजह से 346 परिवार अपने-अपने घरों में ताला लगाकर भाग गए हैं। ये सभी परिवार हिन्दू समुदाय से बताए जाते हैं। पिछले दिनों रंगदारी न देने की वजह से चार हिन्दू व्यापारियों की हत्या कर दी गई। यहां के हिन्दू परिवारों को जान-बूझकर अपने व्यापार छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इनमें से अधिकतक व्यापारी लोहा, सर्राफा और हार्डवेयर से जुड़े थे। इन व्यापारियों से जबरन वसूली की गई। धमकाया गया और बाद में घर, प्रतिष्ठान छोड़ने पर मजबूर किया गया।
      कैराना से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हुकुम सिंह ने घरबार छोडकर भागने वाले 346 परिवारों की सूची के अलावा 10 ऐसे लोगों की सूची जारी की है, जिनकी हत्या रंगदारी न देने पर कर दी गई। उन्होंने पलायन कर रहे लोगों की तुलना कश्मीरी पंडितों से करते हुए कहा कि कैराना में हालात बद से बदतर हैं।
      हालात इस कदर खराब हैं कि इलाके के जहानपुरा गांव में अब एक भी हिन्दू परिवार नहीं रहता। यहां कुछ महीने पहले तक 60-70 हिन्दू परिवार रहते थे। यही नहीं, यह इलाका अवैध हथियारों का केन्द्र बन गया है।
   बताया गया है कि पलायन की यह समस्या मूल रूप से कैराना विधानसभा क्षेत्र की है। जी न्यूज की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, कैराना शहर में हिन्दुओं की आबादी 30 फीसदी थी और मुस्लिम जनसंख्या 68 फीसदी। लेकिन स्थानीय प्रशासन का दावा है कि कैराना में इस वक्त 92 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। हिन्दुओं की आबादी यहां सिर्फ 8 फीसदी रह गई है। आश्चर्य की बात यह है कि एक दशक पहले तक यहां हिन्दुओं की आबादी 60 फीसदी थी। सवाल है कि लोगों की जनसंख्या में इतना बड़ा बदलाव इतनी तेजी से कैसे हो गया?
    उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव की सरकार से पूछा है कि क्या कैराना में रह रहे हिन्दूओं को वहां रहने का अधिकार नहीं?