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पर ये बात ''कैराना/कश्मीर'' के मुसलमानो को कौन समझाए ?

    जौनपुर के रहने वाले इलेक्ट्रिशियन आयाज खान अपनी ''दिब्यांग'' बेटी फातिमा को लेकर मुंबई जा रहे थे! रांची से लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस ट्रेन प्लेटफॉर्म नं-9 से जाने वाली थी! आयाज खान प्लेटफार्म नंबर 1 में अपनी 15 वर्षीय बेटी को गोद में उठकर चल रहे थे पर वह लड़खड़ाने लगे तो पास ही खड़े आरपीएफ के जवान ''वीरभद्र सिंह'' ने ये सब देखा और बोले ''लाइए मैं हमारी बहन को छोड़ देता हूँ'' ! 
    आयाज खान ने अपनी बेटी को एक ''महामानव'' को सुपुर्द कर दिया और फिर उस महामानव ने आइसक्रीम के एक ठेले को कुछ दूर तक व्हील चेयर के रूप में प्रयोग किया और बाद में गोद में उठाकर बोगी में बैठाया ! जब जब ऐसी सकारत्मक समाचार पढता हूँ तो दिल गद गद हो जाता है ! और लगता है की आज भी मानवता ज़िंदा है।
   इंसानियत ज़िंदा है पर ये बात ''कैराना/कश्मीर'' के मुसलमानो को कौन समझाए? पुलिस वालों को ''ठुल्ला' कहने वाले लोगो को कौन बताये ? वीरभद्र सिंह जी के जज्बे को सादर वंदन।