बिहार में बीएड की डिग्री लेकर पैदा हो रहे शिक्षक, फर्जी शिक्षकों की हुई है बहाली

Translate News:

फर्जी डिग्री की हद हद्द हो गयी
     पौराणिक कथाओं के अनुसार अभिमन्यु ने गर्भ में ही चक्रव्यूह की रचना करना और उसमें प्रवेश करना सीख लिया था, लेकिन मॉडर्न बिहार के इन टीचर्स ने तो अभिमन्यु को भी पीछे छोड़ दिया है। बिहार के सहरसा में एक सरकारी स्कूल में शिक्षक एल बी सिंह का जन्म जनवरी 1986 में हुआ था। लेकिन इनकी बीएड की डिग्री देखकर आप हैरान रह जाएंगे। इन्होंने अपने जन्म से 7 साल पहले 1979 में ही बीएड की डिग्री हासिल कर ली थी, ऐसे शिक्षकों की बिहार में काफी संख्या है।
     बिहार एचआरडी मिनिस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि भर्ती हुए 32,127 में से कम से कम 3000 टीचर्स ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की। जिन लोगों का सिलेक्शन नहीं हुआ उनकी शिकायत पर जून 2012 में जांच शुरू होने के बाद अब तक फर्जी दस्तावेज पर भर्ती होने वाले 306 टीचर्स को बर्खास्त कर दिया गया है। बिहार में पहली कक्षा से 8वीं तक पढ़ाने के लिए अभ्यर्थी के पास ग्रेजुएशन के अलावा बीएड की डिग्री होनी जरूरी है। अगर किन्हीं दो लोगों के पास एक जैसी डिग्री हो, तो उनमें से जिसने पहले बीएड किया हो उसे नौकरी दी जाती है। बिहार में ऐसे प्रत्येक रेगुलर टीचर को 32 हजार रुपए तनख्वाह मिलती है। बिहार के वैशाली और गोपालगंज से 39-39 टीचर्स को बर्खास्त किया गया है। जबकि कैमूर से 36 ऐसे टीचर्स अपनी नौकरी गंवा चुके हैं।
Loading...

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top