दान किए साेने के गहनों से बन रहा जैनों का स्वर्ण मंदिर

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    ग्वालियर।। 43 साल पहले शहर की महल कॉलोनी में पाषाण से बने महावीर जिनालय को स्वर्ण मंदिर का रूप दिया गया है। जिनालय के लिए महिलाएं हाथ में पहनी सोने की चूड़ियां और अंगूठियां भी दान में दे रही हैं। कैसा है ये स्वर्ण मंदिर...
       -मंदिर को बनाने के लिए राजस्थान के मकराना से आए मार्बल से वेदी और दरवाजे को बनाया गया और फिर जयपुर के कारीगरों ने दान में आए सोने से पत्तर बनाकर वेदी और मुख्य द्वार को सजाया गया।
-खास बात यह है कि जिनालय को स्वर्ण मय बनाने के लिए महिलाओं ने न केवल अपने हाथ में पहनी सोने की चूड़ियां और अंगूठियां उतार कर दान दे दी वरन नाक के कांटे और कान की बालियां दान में देकर महिलाओं ने समर्पण भाव दिखाया साथ ही पुरुषों ने भी दान दिया।
500 ग्राम सोने के पत्तर बनाकर मारबल पर किया फिक्स
-महावीर जिनालय अध्यक्ष मोती चंद्र जैन ने बताया कि सन 2013 में जैन मुनि कुंथू सागर महाराज का चातुर्मास शिवपुरी में हुआ था और उन्हीं की प्रेरणा से मंदिर की वेदी आकर्षक बनाने के लिए वेदी और मंदिर के गर्भगृह के द्वार को मार्बल से बनाने का निर्णय लिया और फिर मंदिर में स्वर्णकार कराने की प्रेरणा उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को दी।
-सन 2015 तक मंदिर में मार्बल लगाने का कार्य पूर्ण हुआ और इसके बाद शिवपुरी में जब मुनि अभय सागर, मुनि प्रभात सागर, मुनि पूज्य सागर महाराज का चातुर्मास हुआ तो उन्हीं के सानिध्य में जैन समाज द्वारा सहयोग करते हुए वेदी और परिसर में स्वर्ण दान देने के लिए घोषणा हुई।
-आखिर में राजस्थान के मकराना और जयपुर से आए कारीगरों द्वारा इस जिनालय में दान में 500 ग्राम सोने के पत्तर बनाकर उन्हें मारबल पर फिक्स किया गया।
-कुल मिलाकर यह मंदिर अब अपने दर्शनीय स्वरूप में आ स्वर्ण मंदिर की तरह बन गया जहां प्रतिदिन सुबह शाम हजारों श्रद्धालु भगवान की पूजा अर्चना के साथ उनकी आरती करते हैं और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों से बच्चों को संस्कारित करते है।
16 सौ वर्गफीट में बना मंदिर
-24 नबंवर 1969 में मंदिर का शिलान्यास क्षुल्लक नेमी सागर महाराज की सन्निध्य में हुआ।
-1973 को जिनालय निर्माण पूर्ण होने के बाद यहां भगवान महावीर की भव्य पद्मासन प्रतिमा विराजमान की गई और परिसर में शिवपुरी के सफेद पत्थर से निर्मित 35 फीट मानस्तंभ भी जिनालय में लगाए गए।




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