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मंहगाई की मझधार में फंसा मध्यम वर्ग

       मध्यवर्ग की मानसिकता बहुत जटिल होती जा रही है। अच्छी नौकरी या अच्छे व्यापार आदि के चलते मध्यमवर्ग की आकांक्षायें इतनी बढ जाती है, कि इस वर्ग के लोग सुख सुविधाओं के अलावा उन सभी वस्तुओं की इच्छा करने लगते है। इन्हीं साधनो को जुटाने के लिये मध्यमवर्ग के लोग दिन रात भाग दौड करते है। दिन दूनी रात चैगनी बढती मंहगाई के चलते मध्यमवर्ग मझधार में फंसा छटपटा रहा है। अगर मंहगाई इसी तरह बढती रही तो मध्यम वर्ग के लिये वो दिन दूर नहीं जब गरीब वर्ग की श्रेणी में खडा नजर आयेगा।
     मध्यमवर्ग अपने बच्चों को शिक्षा की दौड में आगे बढाने के लिये उच्च आर्थिक वर्ग से प्रतिस्पर्धा करता है, स्थिति वही रही तो आर्थिक ही नहीं शिक्षा के क्षेत्र मे पिछड जायेगा। एक सामाजिक चिंतक का कहना है कि मध्यमवर्ग, उच्चवर्ग के साथ रहने का प्रयत्न करता है,जहाॅ से उसे अपनी आकांक्षाये पूरी होने की आशा हो। मंहगाई ने मध्यमवर्ग की जीवन की आकांक्षाओं पर ग्रहण लगा दिया है। मंहगाई के चलते मध्यमवर्ग घोर निराशा में डूबा प्रतीत होता है। क्योकि उसे अहसास होने लगा है कि अब ज्यादा दिन तक उच्चवर्ग के साथ खडा नहीं रह पायेगा। जब कि मौहम्मद आरिफ का कहना है कि जितनी तेजी से देश की अर्थव्यवस्था लडखडाने लगी है, उतनी ही तेजी से यह वर्ग भी निराश ,उदास और हताश होने लगा है। वही बनवारी लाल कुशवाह का कहना है कि आज के समय में जितनी मंहगाई बढ रही है वह जनसंख्या वृद्वि के कारण बढ रही है।