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कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलों से इन्होने बना डाला Eco Friendly ‘Cooler’

     एशिया को भले ही यूरोपियन पिछड़ा मानते हों, लेकिन जुगाड़ के मामले में एशियाई मुल्कों का कोई सानी नहीं. एशियाई मुल्कों में कुछ हो न हो लेकिन जुगाड़ का जबर्दस्त मॉडल है. भारत में भी जुगाड़ का जबर्दस्त मॉडल चलन में रहा है. लेकिन ताज़ा मामला बांग्लादेश का है, जहां एक जुगाड़ के ज़रिये गरीबों की झोपड़ी के अंदर उबलती गर्मी में तापमान को कम करने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स की खाली बोतलों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
     जी हां, अब बांग्लादेश भी जुगाड़ी मुल्कों की फेहरिस्त में शामिल हो गया है. Youtube पर ग्रामीण इंटेल द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे खाली बोतलों को काटकर एक गत्ते में लगाने के बाद टिन से बनी झुग्गी की खिड़की में लगाने से अंदर का तापमान कम हो जाता है.
     ये तो सभी जानते हैं कि चाहे भारत हो या अन्य एशियाई देश, बिजली की समस्या से सभी वाकिफ़ हैं. गरीबी का आलम इन देशों में ये है कि जिन्हें दो वक़्त की रोटी मयस्सर नहीं हो पाती, वो बिजली का कनेक्शन कैसे लें. इसलिए बिना बिजली के काम करने वाला यह पर्यावरण हितैषी कूलर उन लोगों के लिए जबर्दस्त हिट जुगाड़ है, जो न तो बिजली का कनेक्शन लगवा सकते हैं और न ही बिजली का बिल भर सकते हैं. बावजूद इसके 45 डिग्री से ज्यादा बढ़ते तापमान में अब खुद को कूल रख सकते हैं.
     अगर इस जुगाड़ी कूलर को बनाने की बात करें, तो इसके लिए प्लास्टिक की खाली बोतलों की पेंदी को एक समान काटकर गत्ते के बड़े से टुकड़े में बराबर अंतर पर लगा दिया गया है. सभी जानते हैं कि यह बोतलें मुंह पर संकरी और पेंदी में चौड़ी होती हैं.
     इसके कारण बाहर की गर्म हवा कटी हुई पेंदी के ज़रिये आती है, लेकिन मुंह के छोटे छेद के चलते दबती और ठंडी हो जाती है. परिणामस्वरूप बाहर से आने वाली गर्म हवा और तापमान की तुलना में अंदर की हवा ठंडी और तापमान कम हो जाता है.
    दरअसल, दावा किया जा रहा है कि इसके ज़रिये टिन की झुग्गी के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में करीब पांच डिग्री तक कम हो जाता है.
    इस योजना को बांग्लादेश के ग्रे ग्रुप और ग्रामी़ण इंटेल सोशल बिजनेस लिमिटेड ने मिलकर बनाया है. इनके स्वयंसेवी झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब लोगों को बताते हैं कि कैसे वे इन प्लास्टिक की बोतलों से पर्यावरण हितैषी कूलर बनाएं. बताया जा रहा है कि अब तक बांग्लादेश के 25 हजार से ज्यादा घरों न झुग्गियों में इन्हें लगाया जा चुका है. सच कहूं, तो ऐसे जुगाड़ हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भी हैं.