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छोटे भाई ने पोलियो पीड़ित भाई को पीठ पर बिठाकर कराई पढ़ाई, दोनों भाई हुये IIT में सिलेक्ट!

     ये कहानी है दो भाइयो की जो पिछले 15 साल से छोटे भाई पोलियो पीड़ित भाई को पीठ पर बिठाकर पहले तो स्कूल फिर कोटा कोचिंग में साथ जाते थे! डेढ़ साल की उम्र में पोलियो ने कृष्ण के दोनों पैर छीन लिए, एक हाथ ने भी पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया। कोई और आसरा नहीं था तो कृष्ण स्कूल ही नहीं जा सका। छोटा भाई बसंत स्कूल जाने लगा, तो पीठ पर बैठाकर बड़े भाई को भी ले जाने लगा। सिलसिला 15 साल तक चला। कभी अलग नहीं रहे। कोटा कोचिंग के लिए भी दोना साथ आए। 3 साल तक यहां भी बसंत पीठ पर बैठाकर कृष्ण को कोचिंग और कमरे तक का सफर कराता रहा।
     दोनों भाई बिहार के समस्तीपुर के निकट परोरिया गांव के है ! किसान मदन पंडित करीब 5 बीघा जमीन पर आश्रित हैं। उनके 6 बेटे हैं, दो बड़े भाई मुंबई के किसी गैराज में काम करते हैं। एक भाई इंजीनियरिंग कर रहा है। एक छोटा भाई अभी 10वीं में है। पढ़ाई का खर्च दोनों बड़े भाइयों ने उठाया। कोचिंग ने भी इस साल फीस में 75 फीसदी तक छूट दी।
     अब दोनों भाई का आईआईटी में सिलेक्शन हो गया है! कृष्ण को ओबीसी पीडब्ल्यूडी कोटे में अखिल भारतीय स्तर पर 38वीं और बसंत को ओबीसी में 3769 रैंक मिली है।
    कृष्ण को अब बिछुड़ने का दुख है। वह बताता है कि बसंत मुझे कंधे पर बिठाकर क्लास ले जाता है। घर से लाता है, खाना लगाता है। इधर, बसंत बताता है कि भाई के लिए कुछ भी करता हूं तो खुशी होती है। मैं भी कृष्ण के बिना नहीं रह सकता। पिछले दिनों ही गांव से आते समय इतने दुखी थे कि दो दिन तक ठीक से खाना नहीं खा पाया। जब दोनों 5वीं में थे तो गांव के पास हसनपुर के सकरपुरा में दिव्यांगों के लिए आवासीय शिविर लगा। कृष्ण भी वहां गया। लेकिन, एक दिन बाद टीचर आए और बसंत को भी ले गए।