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NSG पर भारत को न्यूजीलैन्ड का समर्थन, चीन ने माना भारत पहुंचा सदस्यता के करीब

     NSG की सदस्यता के मामले में भारत को न्यूजीलैन्ड का समर्थन हासिल हो सकता है। अमेरिका के एक पत्र के बाद न्यूजीलैंड ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत के समर्थन के लिए अपने रूख में नरमी दिखाई है।
   हालांकि, मुस्लिम बहुल देश तुर्की ने इस मामले में पाकिस्तान के समर्थन की बात कही है। तुर्की की लंबे समय से मांग रही है कि भारत और पाकिस्तान दोनों के आवेदनों पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए।
    गौरतलब है कि तुर्की, न्यूजीलैंड, आस्ट्रिया, आयरलैंड और दक्षिण अफ्रीका NSG में भारत के शामिल होने का विरोध कर रहे हैं।
    इन देशों का मानना है कि भारत को सदस्यता से पहले परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करना चाहिए। हालांकि, भारत इस तरह की किसी भी कार्रवाई का विरोध करता रहा है।
    सर्वविदित कि भारत परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल कल्याणकारी कार्यों के लिए करता रहा है। जहां तक पाकिस्तान की बात है तो विश्व समुदाय को पाकिस्तान के परमाणु संपन्न होने की चिन्ता करनी चाहिए।
    पाकिस्तान में कथित लोकतंत्र और अस्थितर सरकार की वजह से परमाणु संयंत्र सुरक्षित नहीं हैं। ये कभी भी आतंकवादियों के हाथों में जा सकते हैं, जिसका खामियाजा देरसवेर विश्व समुदाय को भुगतना पड़ सकता है।
    इस बीच, चीन के स्टेट मीडिया ने यह स्वीकार किया है कि भारत NSG की सदस्यता के मामले में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। चीन के इस स्वीकारोक्ति के पीछे अमेरिका का ताजा दबाव है। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने सभी NSG देशों को पत्र लिखकर भारत की सदस्यता का विरोध नहीं करने को कहा है। यही वजह है कि न्यूजीलैन्ड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों के रुख में नरमी आई है।
    इससे पहले अमेरिकी समर्थन से मिले बल के बीच NSG की सदस्यता के भारत के दावे को ज्यादातर सदस्य देशों से सकारात्मक संकेत मिले थे, जबकि चीन इसके विरोध पर अड़ा था। माना जा रहा है कि अगले 20 जून को होने वाली बैठक में भारत NSG की सदस्यता के और करीब होगा।