चत्मकार! विपदा से पहले... काला हो जाता है यहां पानी

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    आपने कई प्रकार के चत्मकारी मंदिरों के बारे में पढा और सुना होगा। आज आपको एक ऐसे चत्मकारी मंदिर के बारे में बताने जा रहे है। बडी विपदा आने से पहले ही इस मंदिर के कुंड का पानी काला हो जाता है। जी हां, बात कर रहे है खीर भवानी देवी के मंदिर की जो जम्मू व कश्मीर के गांदरबल जिले में तुलमुला गांव में स्थित है।
    तुलमुला गांव में एक पवित्र पानी के चश्मे के ऊपर स्थित मंदिर है जो कश्मीरी हिंदुओ की आस्था का केंद्र है। खीर भवानी देवी की पूजा लगभग सभी कश्मीरी हिन्दू और बहुत से ग़ैर-कश्मीरी हिन्दू भी, करते हैं। पारंपरिक रूप से वसंत ऋतू में इन्हें खीर चढ़ाई जाती थी इसलिए इनका नाम ‘खीर भवानी’ पड़ा। इन्हें महारज्ञा देवी भी कहा जाता है। इस मंदिर में एक षट्कोणीय झरना है जो देवी का प्रतीत है। किवदंती है कि हिंदुओं के देवता राम ने अपने निर्वासन में इस मंदिर का इस्तेमाल पूजा की जगह के रूप में किया था। निर्वासन की अवधि समाप्त होने के बाद भगवान हनुमान को देवी की मूर्ति को शादिपोरा स्थानान्तरित करने के लिए कहा गया, जहां यह अब भी स्थित है।
     इस मंदिर की एक खास बात यह है कि देश में बड़ी विपदा आने से पहले इस मंदिर के कुंड का पानी काला हो जाता है। अधिकतर रंगों का कोई महत्व नहीं होता, परन्तु जल का रंग कल या गहरा होने पर कश्मीर के लिए अशुभ संकेत मन जाता है बहराल इस वर्ष कुंड का जल शुद्ध एवं साफ़ है श्रद्धालुओं का मानना है की यह घाटी के लिए शुभ संकेत है।
     श्रद्धालु मंदिर परिसर में बने पवित्र झरने में दूध एवं खीर अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर के नीचे बहने वाले पवित्र झरने के रंग से घाटी की स्थिति का संकेत मिलता है। कश्मीर में आई कई विपदाओं से पहले इस कुंड के पानी का रंग बदल चुका है।
     जब 2014 में कश्मीर में बाढ़ आई थी तब भी आपदा आने से पहले इस मंदिर के कुंड का पानी गहरा काला हो गया था तभी सब पंडित समझ गए थे की कोई बड़ी आपदा आने वाली है। यह मंदिर है कश्मीरी पंडितों की आस्था का केंद्र है। हर साल जून में शुक्ल पक्ष की ज्येष्ठ अष्टमी पर यहां मेला लगता है।
     यह पवित्र मंदिर साल भर खुला रहता है, लेकिन जून से लेकर अगस्त तक यहां कुछ ज्यादा ही रौनक रहती है। हर साल देश-विदेश में बसे कश्मीरी पंडित इस मेले में जरूर माता खीर भवानी के दर्शन करने आते हैं। जम्मू कश्मीर घूमने आने वाले सैलानी इस मंदिर में आना नहीं भूलते। कई एकड़ में फैला यह मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है।
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