आजकल कामन सिविल कोड पर ज़ोरदार बहस चल रही है बताया जा रहा है देश में सभी धर्मो के लोगो के लिए शादी और तलाक के लिए एक ही कानून होना चाहिए और महिलाओ अधिकारों को सुरक्षित किया जाना भी ज़रूरी बताया जा रहा है. पुरे भारत में एक ही राज्य ऐसा है जहाँ कामन सिविल कोड लागू है लेकिन जरा इस राज्य के कामन सिविल कोड पर ध्यान दिया जाए तो बात बिलकुल साफ़ है कि ये कानून पूरी तरह से हिन्दू धर्म की महिलाओ के उत्पीडन को रोक नही रहा है बल्कि बढावा दे रहा है.कामन सिविल कोड में मुस्लिम में प्रचलित तीन तलाक पे सुधार और बहु विवाह पे बैन की बात कही जा रही है लेकिन भाजपा शासित गोवा में कामन सिविल कोड पूरी तरह उल्टा है. यहाँ पर मुस्लिम चार तो छोड़िये दो शादी भी नही कर सकते है वही हिन्दू धर्म को मानने वाले पुरषों को दो शादी की छुट दी गयी है वही मुस्लिम के द्वारा प्रचलित तीन तलाक पे कोई रोक नहीं है लेकिन तलाक मौखिक नही लिखित होना चाहिए.
आपको बता दे मशहूर वकील फल्विया इग्नेस ने कामन सिविल कोड पर अपनी राय देते हुए कहा था कि अब तक गोवा में ही कामन सिविल कोड है लेकिन वहां हिन्दू पुरषों को दो शादियों की छुट है और मुस्लिम पर बैन है इस लिए कामन सिविल कोड महीला अधिकारों के लिए बल्कि राजनैतिक फायदे के लिए है .आपको बता दे गोवा सिविल कोड को यहाँ गोवा फैमिली लॉ के नाम से भी जाना जाता है। इस कानून को 1870 में गोवा में लागू किया गया था लेकिन भाजपा के नेताओ और मीडिया द्वारा गोवा के इसी कामन सिविल कोड को आदर्श बताया जा रहा है.
