क्या आप जानते है रावण का ससुराल राजस्थान में था अगर नहीं तो देखे यह जानकारी

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देखें लंका के रावण की शादी का मंडप वो भी राजस्थान में
    दशानन रावण के बारे में कई लोक मान्यताएं प्रचलित है। एक मान्यता यह है कि रावण का विवाह जोधपुर (राजस्थान) की प्राचीन राजधानी मंडोर में मयासुर की पुत्री मंदोदरी के साथ हुआ था। मंडोर की पहाड़ी पर खंडहर में बदल रहे एक स्थान के बारे में मान्यता है कि रावण ने यहीं पर मंदोदरी के साथ सात फेरे लिए थे।
     रावण की बारात में साथ आए कुछ ब्राह्मण यहीं पर बस गए। इन लोगों ने जोधपुर में बाकायदा मंदिर बनवा इसमें रावण व मंदोदरी की विशाल प्रतिमा स्थापित कर रखी है। इनकी नियमित पूजा भी करते है।
यह है लोक मान्यता...
- ऐसा कहा जाता है कि असुरों के राजा मयासुर का दिल हेमा नाम की एक अप्सरा पर आ गया। हेमा को प्रसन्न करने के लिए उसने जोधपुर शहर के निकट मंडोर का निर्माण किया।
- मयासुर और हेमा की एक बहुत सुंदर पुत्री का जन्म हुआ। इसका नाम मंदोदरी रखा गया। एक बार मयासुर का देवताओं के राज इन्द्र के साथ विवाद हो गया और उसे मंडोर छोड़ कर भागना पड़ा।
- उसके जाने के बाद मंडूक ऋषि ने मंदोदरी की देखभाल की। अप्सरा की बेटी होने के कारण मंदोदरी बहुत सुंदर थी। ऐसी रूपवती कन्या के लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा था।
- आखिरकार उनकी खोज उस समय के सबसे बलशाली और पाराक्रमी होने के साथ विद्वान राजा रावण पर जाकर पूरी हुई। उन्होंने रावण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा। मंदोदरी को देखते ही रावण उस पर मोहित हो गया और शादी के लिए तैयार हो गया।
- तब रावण अपनी बारात लेकर शादी करने के लिए मंडोर पहुंचा। मंडोर की पहाड़ी पर अभी भी एक स्थान को लोग रावण की चंवरी(ऐसा स्थान जहां वर-वधू फेरे लेते है) कहते है।
जोधपुर में रावण-मंदोदरी का मंदिर
- ऐसी लोक मान्यता है कि रावण के साथ बाराती बन कर आए गोधा गौत्र के कुछ ब्राह्मण बारात की रवानगी के समय रावण के साथ वापस लंका नहीं गए।
- ये ब्राह्मण मंडोर में ही बस गए। बाद में मारवाड़ की राजधानी मंडोर के स्थान पर जोधपुर होने पर ये लोग जोधपुर में आकर बस गए।
- इन्हीं ब्राह्मणों के कुछ वंशजों ने जोधपुर में चांदपोल के निकट रावण का मंदिर बनवा दिया। इस मंदिर में रावण व मंदोदरी का विशाल प्रतिमाएं स्थापित है और उनकी नियमित पूजा की जाती है।
- मंदिर में शिवभक्त रावण व मंदोदरी को भगवान शिव की पूजा करते हुए दर्शाया गया गया है।
- हर साल रावण दहन के समय गोधा गौत्र के ब्राह्मण बाकायदा शोक प्रकट करते है और किसी के दाह संस्कार से लौटने के पश्चात होने वाले सारे नियमों की पालना करते है। यहां तक कि जनेऊ तक बदलते है।

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