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भारत सीईआरएन, जेनेवा का सहायक सदस्य बना

Image result for india is a member of CERN geneva    भारत 21 नवंबर 2016 को दुनिया के सबसे बड़े परमाणु और कण भौतिकी प्रयोगशाला, यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन (European Organisation for Nuclear Research - CERN) का सदस्य बना। CERN के डायरेक्टर जनरल ने कहा कि भारत की सदस्यता भारतीय उद्योगों को CERN परियोजनाओं में प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी के लिए अवसर प्रदान करेगी। एक सदस्य राष्ट्र के रूप में, भारत CERN में वार्षिक रूप से लगभग 77 करोड़ का योगदान देगा।
    समझौते पर 21 नवंबर 2016 को मुंबई में डॉ शेखर बसु, अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग और सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा सर्न के महानिदेशक डॉ फैबिओला गिआनोत्ती द्वारा हस्ताक्षर किए गए।
सदस्य बनने के लाभ:
     यह एसोसिएट सदस्यता अब भारत को सर्न परिषद की बैठकों में शामिल होने के जरिए सर्न के प्रशासन में भाग लेने की अनुमति देगा। इसके अलावा, यह भारत के वैज्ञानिकों को सर्न स्टाफ का सदस्य बनने और सर्न के प्रशिक्षण और करिअर विकास कार्यक्रमों में हिस्सा बनने की भी अनुमति देगा।
    अंत में, यह भारतीय उद्योग को सर्न अनुबंधों के लिए बोली लगाने की अनुमति देगा और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में औद्योगिक सहयोग के लिए अवसरों के द्वार खोलेगा।
यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन (सर्न):
     सर्न (यूरोपीय नाभिकीय अनुसन्धान संगठन) कण भौतिकी की विश्व की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। यह फ्रान्स और स्विट्जरलैण्ड की सीमा पर जिनेवा के उत्तर-पश्चिमी उपनगरीय क्षेत्र में है। इस संस्था में 22 सदस्य देश हैं। इस समय लगभग 2600 स्थाई कर्मचारी एवं दुनिया भर के कोई 500 विश्वविद्यालयों एवं 80 राष्ट्रों के लगभग 7930 वैज्ञानिक एवं अभियन्ता कार्यरत हैं। भारत एसोसिएट सदस्यता मिलने से पहले इसका एक पर्यवेक्षक देश था।
    इसका प्रमुख उद्देश्य उच्च ऊर्जा भौतिकी से सम्बन्धित अनुसंधान करने के लिये विभिन्न प्रकार के कण त्वरकों का विकास करना है। इसकी स्थापना 1954 में हुई तथ इसका मुख्यालय जिनेवा में है।