भारत एक विकासशील देश है और अभी भी लगभग 40 प्रतिशत जनता गरीबी रेखा से नीचे है, और ना जाने कैसे अपना गुजारा करती है। देश के हर चैराहें रोड पर आपको भीख मांगते कई भिखारी नजर आते है, जिन्हें आप शायद रोज 1-2 रूपए देते है। लेकिन जरा सोचिए, कि आप जिस भिखारी को सिक्कों की भीख देते हैं, वह दरअसल एक करोड़पति निकलें तो !! आपके चेहरे का भाव निश्चित तौर पर देखने लायक होगा। लेकिन यह सत्य है, आज हम आपको जिन भिखारियों से मिलवाने जा रहे है, वे दरअसल भारत के सबसे अमीर भिखारियों में से एक हैं। वे सुविधा-सम्पन्न हैं। उनके बच्चे कॉन्वेन्ट स्कूलों में पढ़ते हैं। उनके पास खुद का बिजनेस है, दुकानें हैं और बैंक बैलेन्स करोड़ों में है। इसके बावजूद भीख मांगना इनका पेशा है। तो चलिए, मिलते हैं इन करोड़पति भिखारियों से
भरत जैन
पप्पू कुमार
मासु
यह साहब फिल्म स्टूडियो में कपड़े बदल कर ऑटो से भीख मांगने वाली जगह पर पहुंचते हैं। मासु भी मुंबई के परेल से ताल्लुक रखते हैं।
कृष्ण कुमार गीते
सार्वितीया देवी
इनसे मिलिए, ये हैं भारत की सबसे प्रसिद्ध महिला भिखारी सार्वितीया देवी। ये पटना में रहती है और सालाना 36 हजार रुपए एलआईसी प्रीमियम का भुगतान करती हैं। भीख से हुई आमदनी से ये अपनी बेटी की शादी कर चुकी हैं और इनके पास भी खुद का घर है।
संभाजी काले
संभाजी भिखारी मुंबई के स्लम क्षेत्र विरार से आते हैं। इनकी रोज़ाना आमदनी 1500 रुपए है। इसके इलावा इनके पास खुद के 2 घर और इतने ही प्लॉट है। और तो और इन्होने बैंकों में भी निवेश कर रखा है।
हाजी
रामबाई
खम्मम की रामबाई को हर कोई जनता है। ये खम्मम में बहुत लोकप्रिय हैं। हालांकि इन्होने अपनी संपत्ति का खुलासा तो नही किया पर जिस दिन इनकी संपत्ति की पोटरी का खुलासा होगा। आपके ज़रूर होश उड़ जाएँगे।
लक्ष्मी दास
लक्ष्मी दास को सबसे बुजुर्ग भिखारी माना जाता है। लक्ष्मी 1964 में 16 साल की उम्र से भीख मांग रही है। लक्ष्मी दास को पोलियो है और इन्होने भीख मांग-मांग कर मोटा बैंक बैलेन्स बना लिया है। अभी हाल ही में उन्हें बैंक का क्रेडिट कार्ड मिला है। है न कमाल!
